Wednesday, July 10, 2024

जमुई जिले के लक्ष्मीपुर तालुका , काला पंचायत की कहानी इन दिनों स्वामी विवेकानंद जी के उस कथन को चरितार्थ कर रही है,


जमुई जगे! लक्ष्मीपुर ,काला पंचायत के आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषणहीनता का दंश, स्वामी विवेकानंद की वाणी हुई दुर्लभ!

जमुई जिले के लक्ष्मीपुर तालुका , काला पंचायत की कहानी इन दिनों स्वामी विवेकानंद जी के उस कथन को चरितार्थ कर रही है, जहाँ उन्होंने कहा था, "बल ही जीवन है, कमजोरी ही मृत्यु है। विकास ही जीवन है, रुकावट ही मृत्यु है। प्रेम ही जीवन है, घृणा ही मृत्यु है।"

काला पंचायत के वार्ड नंबर 8 के आंगनबाड़ी केंद्र से आ रही खबरें बेहद परेशान करने वाली हैं। यह केंद्र, जो  बच्चों के सर्वांगीण विकास का मंदिर बनना चाहिए था, वहां हाहाकार मचा है।

  • पोषणहीनता का तांडव: सरकार द्वारा भेजा जाने वाला पोषाहार बच्चों तक नहीं पहुंच पा रहा है। या तो मात्रा नाकाफी है या फिर उसका दुरुपयोग हो रहा है। कमजोर शरीर, कुंठित मन - यही है इन बच्चों का भविष्य बनता हुआ दिख रहा है।

  • सेविका की लापरवाही: केंद्र की देखभाल करने वाली सेविका की लापरवाही स्वामी विवेकानंद जी के उस आदर्श से कोसों दूर है, जहां कर्तव्य सर्वोपरि है। बच्चों के हितों की अनदेखी भला विकास को कैसे जन्म दे सकती है?

  • शिक्षा का अभाव: आंगनबाड़ी केंद्र ज्ञान का प्रारंभिक द्वार माने जाते हैं, मगर यहां शिक्षा का अभाव बच्चों के बौद्धिक विकास में बाधा बन रहा है।

  • आवश्यक सामग्री का दुरुपयोग: बच्चों के भोजन के लिए भेजी जाने वाली सामग्री का दुरुपयोग हो रहा है। यह स्थिति स्वामी विवेकानंद जी के उस सिद्धांत का उल्लंघन है, जहां चरित्र निर्माण को सर्वोच्च स्थान दिया जाता है।

क्या यही है वह वातावरण जिसकी उम्मीद हमें अपने बच्चों के लिए करनी चाहिए? हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था, "आज हमें जिस भारत की आवश्यकता है, वह है चरित्रवान मनुष्यों का भारत।"

आंगनबाड़ी केंद्रों की बदहाली जमुई प्रशासन के लिए एक गंभीर प्रश्न है। क्या वे स्वामी विवेकानंद जी के सपनों के भारत का निर्माण करने में सक्षम होंगे?

वार्ड नंबर 8 के सजग प्रतिनिधि, श्री परमानन्द पंडित, ने इस ज्वलंत मुद्दे को उठाया है और उन्होंने आधिकारिक रूप से संबंधित विभागों को शिकायत पत्र सौंपा है।

आप शिकायत पत्र की तस्वीर और आंगनबाड़ी केंद्र की जर्जरता को दर्शाती कुछ तस्वीरें भी देख सकते हैं (

।आपको क्या लगता है?

क्या श्री परमानन्द पंडित द्वारा उठाए गए कदमों और हमारी सामूहिक आवाज से इस ज्वलंत मुद्दे का समाधान होगा?

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