Tuesday, July 23, 2024

पांडेय परिवार का एक योद्धा सड़क हादसे में खोया



शब्दों में बयां नहीं हो सकता है वो दर्द, वो ख़ालीपन... एक ऐसा ख़ालीपन जिसे भरना नामुमिन है. कुछ ही दिनों पहले, कल यानी 22 जुलाई को जिंदगी में जो रौनक थी, जो हँसी थी, वो सब सड़क हादसे की भेंट चढ़ गई. हमारे पांडेय परिवार से एक योद्धा छीन लिया गया.

वह भारतीय सेना का एक जांबाज सिपाही था, जो लद्दाख के दुर्गम इलाकों में देश की रक्षा कर रहा था. जमुई जिले के गिद्धौर प्रखंड के पास सड़क हादसे में उसकी असमय शहादत हो गई. ये कैसी विडंबना है कि जिसने देश की रक्षा करने की قسم (kasam) खाई थी, उसी की जान सड़क हादसे ने ले ली.

हालांकि मैं उनसे कभी नहीं मिला, उनकी वीरता और परिवार के लिए प्यार के बारे में उनके परिजनों से ज़रूर सुना है. उनकी वर्दी में देखते ही एक अलग ही सुरक्षा का भाव जगा करती थी, ऐसा मैंने उनके परिवार के लोगों से सुना है. हमेशा मुस्कुराने वाला चेहरा, देश सेवा का जज़्बा, और अपने परिवार के लिए अपार प्यार... यही चीज़ें थीं जो उन्हें सबसे ख़ास बनाती थीं.

उनके एक मामा, जिनसे मेरी बातचीत हुई, उन्होंने बताया कि वह न सिर्फ एक वीर सैनिक थे, बल्कि एक बेहद ईमानदार और ज़िम्मेदार इंसान भी थे.

चाहे तो लौट आते वो दिन, पर ये वक्त है, जिसे बदलना किसी के बस में नहीं. सड़क हादसे ने ना सिर्फ उन्हें हमसे दूर किया, बल्कि देश को भी एक वीर जवान से दूर कर दिया.

इस हादसे ने निश्चित रूप से पांडेय परिवार को अंदर ही अंदर खोखला कर दिया है. हर तरफ बस सन्नाटा है. हर आँख नम है.

उनकी शहादत हमें हर वक्त याद दिलाती है कि ज़िन्दगी कितनी अनमोल है. सड़क हादसे कितनी आसानी से जिंदगी छीन लेते हैं.

अगर आप ये ब्लॉग पढ़ रहे हैं, तो मेरी आपसे बस इतनी ही गुहार है कि सड़क पर कभी भी लापरवाही न बरतें. यातायात के नियमों का पालन करें. अपनी और दूसरों की ज़िन्दगी को खतरे में ना डालें.

शायद मेरी कहानी किसी की आँखें खोल दे, शायद कोई एक भी सड़क हादसा कम हो जाए. यही पांडेय परिवार के वीर सैनिक को सच्ची श्रद्धांजलि होगी.

No comments: