ब्लॉगर: झूला देवी और हमारे जैसे अनेक ग्रामीण उपभोक्ताओं की आवाज़, काला पंचायत, जमुई से
जमुई, 20 जून 2024:
SBPDCL (साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी) के घोटाले ने अब मानवाधिकार उल्लंघन का रूप ले लिया है! काला पंचायत की झूला देवी ने आज घोषणा की कि वे राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) में धारा 12 के तहत शिकायत दर्ज कराएंगी, क्योंकि बिजली बिना मीटर चले 6 साल तक बिल काटना हमारे मूलभूत अधिकारों का हनन है!
कानूनी धमाका!
- भारतीय विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 56 के अनुसार, बिना मीटर रीडिंग के बिल अवैध
- मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 की धारा 12 के तहत आर्थिक शोषण के खिलाफ केस
- उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत ₹5 लाख तक का मुआवजा मांगा जाएगा
6 दिसंबर 2023 को हमारे घर में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगा दिया गया। हाल ही में SBPDCL ने एक ईमेल भेजा जिसमें कहा गया कि हमारी शिकायत हल कर दी गई है और एक "सुधारित बिल" भेजा गया है – जिसमें ₹12,626.26 समायोजन में डाला गया है। लेकिन उसमें न तो कोई स्पष्ट हिसाब है, न ही पुरानी गड़बड़ियों की जवाबदेही। यह कैसा समाधान है SBPDCL? क्या आपको यह जवाब देना ज़रूरी नहीं लगता कि आखिर छह साल तक बिना बिजली के बिल क्यों काटे गए?
अब SBPDCL को यह समझना होगा कि हम ग्रामीण उपभोक्ता अब चुप नहीं बैठेंगे। हमसे चुपचाप पैसे वसूल लेना आसान है, लेकिन अब जवाब भी देना पड़ेगा।
बिजली आई नहीं, मीटर चला नहीं, फिर भी आया बिल
हमें 28 नवम्बर 2018 को दक्षिण बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (SBPDCL) की ओर से बिजली कनेक्शन दिया गया। लेकिन दुख की बात ये रही कि न तो बिजली नियमित आई, न ही मीटर ने कभी सही से काम किया। फिर भी हर महीने हमारे नाम पर बिल आता रहा – जिसमें ₹191.20 नियत शुल्क और ₹37.33 बिजली ड्यूटी जुड़ी होती थी।
कुल अतिरिक्त भार: ₹16,453.96
जब हमने यह जोड़-घटाया, तो पता चला कि बीते 72 महीनों में लगभग ₹16,453.96 का बोझ बिना बिजली उपयोग किए हम पर डाल दिया गया। सोचिए, एक गरीब बीपीएल परिवार के लिए यह राशि कितनी भारी है!
बार-बार शिकायत, लेकिन सुनवाई नहीं
हमने 17 अगस्त 2019 को लक्ष्मीपुर बिजली कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज करवाई थी, और फिर 2023 में दोबारा अनुस्मारक दिया। दोनों शिकायतों की रसीदें हमारे पास हैं, लेकिन अब कंपनी कहती है कि कोई शिकायत लंबित नहीं है।
स्मार्ट मीटर लगाया गया, लेकिन पुरानी गलती पर चुप्पी
अब कंपनी का रवैया यह है कि नया मीटर लगाकर और बिना हिसाब-किताब का बिल भेजकर पुराना पाप धो लिया जाए। SBPDCL से हम पूछते हैं – क्या गरीबों के साथ ऐसा ही व्यवहार होता है? क्या हमारे पैसे की कोई कीमत नहीं है?
सवाल अभी बाकी हैं...
- जब मीटर चालू नहीं था, तब बिल कैसे बना?
- क्यों नहीं हुई कार्रवाई 2019 और 2023 की हमारी शिकायतों पर?
- क्या हम गरीब ग्रामीणों की आवाज़ इतनी कमजोर है कि सिस्टम हमें नजरअंदाज कर दे?
हमारा अगला कदम
अगर SBPDCL हमारी आपत्ति का उचित समाधान नहीं करता, तो हम यह मामला बिजली लोकपाल, उपभोक्ता फोरम, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), और बिहार लोक शिकायत निवारण कार्यालय तक लेकर जाएँगे।
यह आवाज़ सिर्फ झूला देवी की नहीं है — यह हम सबकी आवाज़ है। यह उन सभी ग्रामीण परिवारों की आवाज़ है, जो आज भी बिजली बिल में हुई गड़बड़ियों का शिकार हैं। अब हमें बोलना होगा, अब हमें हिसाब चाहिए!
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अगर आप चाहें तो मैं इसका एक पीडीएफ या सोशल मीडिया पोस्ट फॉर्मेट भी बना सकता हूँ। बताइए, अगला कदम क्या हो?
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