Thursday, April 10, 2025

जमुई में मनरेगा कार्यों में बड़ा घोटाला! एक ही स्थान, एक ही समय, दो योजनाओं में दिखाया गया मजदूरों की उपस्थिति




जमुई (संवाददाता)। बिहार के जमुई जिले में मनरेगा (MNREGA) योजनाओं में फर्जीवाड़े का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। खासकर बरहट प्रखंड के मल्हेपुर पंचायत में दो अलग-अलग कार्यों की डिजिटल उपस्थिति रिकॉर्ड से यह साफ होता है कि एक ही मजदूरों को एक ही समय और स्थान पर दो योजनाओं में मौजूद दिखा दिया गया, जिससे सरकारी राशि का अनुचित उपयोग होने की आशंका है।


तस्वीरें और समय का मेल नहीं, मगर उपस्थिति 'हाज़िर'

सरकारी पोर्टल मनरेगा वेब के अनुसार मस्टर रोल नंबर 125 के तहत खींची गई फोटो सुबह 08:23:09 पर ली गई और 08:23:39 पर अपलोड की गई।

वहीं दूसरी ओर, उसी स्थान पर खींची गई एक और तस्वीर मस्टर रोल नंबर 126 की टाइमिंग 08:22:39 है, जिसे 08:23:47 पर अपलोड किया गया।

दोनों तस्वीरों में वही मजदूर और वही पृष्ठभूमि नजर आ रही है, सिर्फ उनकी पोजीशन बदली गई है। इससे स्पष्ट होता है कि एक ही मजदूरों को दो योजनाओं में उपस्थित दिखा कर सरकारी धन की हेरा-फेरी की गई है।


‘सविता सिंह’ नामक मेट की फोटो में दोहरी भूमिका

दोनों योजनाओं की फोटो मेट सविता सिंह द्वारा अपलोड की गई हैं, जिससे यह मामला और भी संदिग्ध बन जाता है। यदि एक ही व्यक्ति दो योजनाओं के लिए एक ही स्थान पर इतने कम समय में उपस्थिति दर्ज कर रहा है, तो यह पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाता है।


सोनो , लक्ष्मीपुर प्रखंड ने सीखा सबक, बाकी अब भी लापरवाह

जिले का सोनो, लक्ष्मीपुर प्रखंड जहां धीरे-धीरे डिजिटल पारदर्शिता की ओर बढ़ रहा है, वहीं बरहट और सिकंदरा जैसे क्षेत्रों में अभी भी फर्जी उपस्थिति दर्ज करने का खेल जोरों पर है। इससे यह स्पष्ट है कि कुछ ब्लॉकों ने व्यवस्था से सीख ली, लेकिन कई अब भी पुराने घोटालेबाज़ तरीकों में लगे हुए हैं।


जनहित की माँगें

  • सभी मस्टर रोल्स की जाँच हो।
  • संबंधित मेट व अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हो।
  • मजदूरों की उपस्थिति की पुष्टि गाँव स्तर पर कराई जाए।
  • NMMS ऐप का पारदर्शी और ईमानदार इस्तेमाल सुनिश्चित किया जाए।

प्रशासन अब भी चुप, पर जनता जागरूक

अब तक प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, पर यह मामला सोशल मीडिया व स्थानीय रिपोर्टिंग से धीरे-धीरे तूल पकड़ रहा है। यदि समय रहते जांच नहीं हुई, तो यह जिला ही नहीं, राज्य के स्तर पर घोटाले का उदाहरण बन सकता है।


(यह रिपोर्ट जमीनी स्तर पर जुटाए गए डिजिटल साक्ष्यों पर आधारित है। यदि आपके पास भी ऐसे कोई दस्तावेज या फोटो हैं, तो साझा करें, ताकि सच्चाई उजागर हो सके।)


अस्वीकरण (Disclaimer):

यह लेख केवल जनहित में सूचना और जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें प्रस्तुत तथ्यों, आंकड़ों और तस्वीरों का स्रोत सार्वजनिक पोर्टल एवं डिजिटल रिकॉर्ड हैं। साथ ही, विषय को बेहतर ढंग से प्रस्तुत करने के लिए उपयोग की गई caption photo एक AI जनित चित्र है, जिसका उद्देश्य केवल विषयवस्तु को स्पष्ट रूप से दर्शाना है।

इस लेख का उद्देश्य किसी व्यक्ति, संस्था या अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाना नहीं है। यदि किसी तथ्य में सुधार की आवश्यकता हो या कोई आपत्ति हो, तो लेखक से संपर्क कर उचित समाधान का अनुरोध किया जा सकता है। लेखक किसी भी प्रकार की कानूनी, प्रशासनिक या तकनीकी त्रुटियों के लिए उत्तरदायी नहीं है।

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