SBPDCL जमुई हाय-हाय! हमारे गांव के साथ अन्याय नहीं सहेंगे!
गांव: काला पंचायत, प्रखंड: लक्ष्मीपुर, जिला: जमुई (बिहार)
हमारे गांव की झूला देवी पिछले 6 सालों से SBPDCL की लापरवाही का बोझ ढो रही हैं।
उनके मीटर की रीडिंग लगातार 0 यूनिट रही, बिजली का कोई उपयोग नहीं हुआ, फिर भी हर महीने ₹228.53 का बिल उन्हें भेजा गया।
हमने ब्लॉग लिखे, शिकायतें कीं, लोकशिकायत पोर्टल और RTI में मामला उठाया —
तो अब SBPDCL ने फोन कर कहा:
“पूरा ₹22,000 मत भरो, सिर्फ ₹12,000 देकर मामला खत्म करो।”
हम पूछते हैं – ₹12,000 किस बात का?
- जब हमारी झूला देवी ने बिजली का एक बल्ब भी नहीं जलाया,
- जब विभाग ने हमारी पहली ही शिकायत को नज़रअंदाज़ किया,
- जब 6 साल तक कोई मीटर चेक करने नहीं आया —
तो अब ₹12,000 वसूलना किस आधार पर है?
SBPDCL जमुई हाय-हाय! ये समझौता नहीं, दबाव है
हमारे गांव की महिलाएं चुप नहीं बैठेंगी,
हमारे बुजुर्ग अब लाचार नहीं हैं,
हमारे युवा अब सवाल पूछेंगे —
बिजली नहीं जली, फिर बिल क्यों?
शिकायत के बाद भी सुनवाई नहीं — फिर भुगतान क्यों?
अब गांव-गांव गूंज रहा है एक ही स्वर:
SBPDCL हाय-हाय!
हमारे अधिकार वापस करो!
हमारा हक दो, अन्याय बंद करो!
हमारी सामूहिक मांगें:
- हमारी झूला देवी से मांगा गया ₹12,000 पूरी तरह माफ किया जाए।
- SBPDCL के वे कर्मचारी जिन्होंने 6 साल तक शिकायत दबाए रखी, उन पर जांच और निलंबन हो।
- हमारे पूरे लक्ष्मीपुर प्रखंड के उपभोक्ताओं के 0 यूनिट कनेक्शन की बिल समीक्षा और समाधान हो।
हम चुप नहीं रहेंगे – क्योंकि ये हमारे गांव की लड़ाई है, हमारे हक़ की लड़ाई है
हमारे सवालों का जवाब चाहिए:
-
जब बिल नहीं भरा जाता, तो विभाग खुद कनेक्शन काट देता है —
तो 6 साल तक बिना बिल भुगतान के कनेक्शन चालू क्यों रहा? -
जब झूला देवी ने शिकायत की थी —
तो विभाग ने उसे नजरअंदाज क्यों किया?
बोलो – SBPDCL...? हाय-हाय!
बोलो – गरीबों से लूट...? बंद करो!
बोलो – हमारे हक का पैसा...? वापस करो!**
(रिपोर्ट: ग्राम संवाददाता, समझौते का दुनिया– जमुई)
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