बिहारी लोक कला: बाउके चाँद चोर (Boycott Chanda Chor)
बिहार अपनी समृद्ध लोक कलाओं और परंपराओं के लिए जाना जाता है। उन्हीं में से एक अनोखी कला है बाउके चाँद चोर। यह एक पारंपरिक नृत्य-नाटिका है, जो मुख्य रूप से मिथिला क्षेत्र में प्रचलित है।
बाउके चाँद चोर का अर्थ (Meaning of Boycott Chanda Chor)
"बाउके" शब्द का अर्थ है "बावरा आदमी" और "चाँद चोर" का अर्थ है "चाँद को चुराने वाला।" इसलिए, इस नाटिका का नाम ही इसके विषय का संकेत देता है। यह एक पागल आदमी की कहानी है जो चाँद को चुराने का नाटक करता है।
बाउके चाँद चोर का प्रदर्शन (Performance of Boycott Chanda Chor)
बाउके चाँद चोर का प्रदर्शन आमतौर पर पुरुष कलाकारों द्वारा किया जाता है। वे ढोल की थाप पर नाचते हैं और चाँद को चुराने का अभिनय करते हैं। वे अपने हाव-भाव और चेहरे के हल्के फुल्के बनावट से दर्शकों का मनोरंजन करते हैं। कई बार यह नाटिका हास्य व्यंग के रूप में भी प्रस्तुत की जाती है, जिसमें सामाजिक मुद्दों पर भी चुटकी ली जाती है।
बाउके चाँद चोर का महत्व (Importance of Boycott Chanda Chor)
बाउके चाँद चोर न केवल मनोरंजन का एक स्रोत है, बल्कि यह बिहार की लोक संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भी है। यह कला पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है और यह ग्रामीण जीवनशैली की झलक दिखाती है। यह नाटिका हमें अपनी जड़ों से जोड़े रखती है और साथ ही साथ समाज में हास्य का भाव बनाये रखने में भी मदद करती है।
आप किसी भी लोक कला उत्सव या बिहार दिवस समारोह में बाउके चाँद चोर की प्रस्तुति देख सकते हैं।
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