आज का सफर वाकई खास है! पटना से किउल तक की ये यात्रा एर्णकुलाम एक्सप्रेस में कट रही है. पर खास बनाने वाली चीज़ ना तो कोई खूबसूरत नज़ारा है और ना ही कोई स्वादिष्ट भोजन. आज का दिन खास है मेरी बेटी की वजह से.
देखिए, मैं हमेशा से ही स्वच्छता का बहुत ध्यान रखती हूँ. घर हो या दफ्तर, सफाई मेरे लिए प्राथमिकता होती है. मगर आज कुछ ऐसा हुआ जिसने मुझे गर्व से भर दिया.
ट्रेन में जब हम अपना सामान रख कर बैठे, तो मेरी बेटी हमेशा की तरह इधर-उधर घूमने लगी. थोड़ी देर बाद वो डिब्बे के फर्श पर बैठकर खेलने लगी. पहले तो मैं थोड़ा घबराई. ट्रेन की फर्श तो अक्सर गंदी होती है ना!
लेकिन, तभी मुझे एहसास हुआ कि डिब्बे का फर्श बिलकुल साफ है! कोई दाग़ नहीं, कोई धूल नहीं, कुछ भी नहीं! बस इतनी सी बात ने मेरा नज़रिया ही बदल दिया.
अरे, ये तो साफ-सुथरे डिब्बे का जीता जागता सबूत है! आज मेरी बेटी अनजाने में ही इंडियन रेलवे की सफाई की ब्रांड एंबेस्डर बन गई. वो फर्श पर खेल कर ये बता रही थी कि अब ट्रेनों में सफाई काफ़ी बेहतर हो चुकी है.
मुझे उम्मीद है कि रेलवे आने वाले समय में भी इसी तरह सफाई पर ध्यान देता रहेगा. स्वच्छ ट्रेनें न सिर्फ यात्रा को सुखद बनाती हैं बल्कि सेहत के लिए भी बेहतर होती हैं. इसलिए, स्वच्छ सफर के लिए रेलवे का शुक्रिया और मेरी बेटी को भी थोड़ा सा श्रेय!
No comments:
Post a Comment