आज मैं अपने साले की बारात में नवादा जिले के रोह प्रखंड में हूँ। साले के कुछ दोस्त और मैं उनके साथ बैठा हुआ हूँ। शादी समारोह एक सरकारी स्कूल में हो रहा है। यहां सभी मेहमान आराम फरमा रहे हैं। बिहार में शादियों में सरकारी स्कूलों में मेहमानों के ठहरने का रिवाज है।
यह परंपरा दिलचस्प है, लेकिन इससे जुड़ा एक सवाल भी उठता है। इतने सारे मेहमान स्कूल में ठहरे हुए हैं, तो कल स्कूल कैसे चलेगा? बच्चों की पढ़ाई का क्या होगा?
शायद इस बारे में कोई ठोस इंतजाम होता होगा। हो सकता है स्कूल बंद कर दिया जाता हो या फिर किसी अस्थायी व्यवस्था का सहारा लिया जाता हो।
इस अनुभव ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया। बिहार की शादियों में ये परंपरा कितनी पुरानी है, ये तो पता नहीं, लेकिन ये ज़रूर है कि ये समाजिक समारोहों को निभाने का एक किफायती तरीका है। हालाँकि, इस परंपरा के साथ शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित ना करने का भी ध्यान रखना ज़रूरी है।
आपको बिहार की शादियों में ये परंपरा कैसी लगती है? क्या इसे जारी रखा जाना चाहिए या इसमें कुछ बदलाव की ज़रूरत है? हमें कमेंट्स में अपनी राय ज़रूर दें!
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