Saturday, April 13, 2024

कला पंचायत में नया मोड़: डॉक्टर हाहा-जी का सेवाभाव!


काला  पंचायत में चुनाव का माहौल गरम है। इस बार चर्चा का विषय है डॉक्टर हाहा-जी। जहां एक तरफ रवि, ओमप्रकाश और राणा जैसे नेता जोर-शोर से चुनावी भाषण दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ डॉक्टर हाहा-जी अपने शांत सेवाभाव से ग्रामीणों का दिल जीत रहे हैं।

डॉक्टर हाहा-जी का गांव के लोगों से सीधा जुड़ाव है। वह न सिर्फ एक डॉक्टर हैं, बल्कि एक मसीहा की तरह हर वक्त ग्रामीणों की मदद के लिए तैयार रहते हैं। गरीबों को मुफ्त इलाज और दवाइयां मुहैया कराना उनका नियम है। उनकी दवा किसी मंत्र से कम नहीं, जो न सिर्फ बीमारी दूर करती है बल्कि लोगों के चेहरे पर मुस्कान भी लाती है।

चुनाव की रणभूमि में जहां ओमप्रकाश, राणा और रवि जातिगत समीकरण बिठाते नजर आ रहे हैं, वहीं डॉक्टर हाहा-जी जाति से ऊपर उठकर हर किसी की सेवा के लिए तत्पर हैं। उनकी निस्वार्थ सेवा भावना ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है।

लेकिन क्या सिर्फ सेवाभाव ही चुनाव जीतने के लिए काफी है?

यह एक बड़ा सवाल है। कला पंचायत के इतिहास में शायद ही ऐसा हुआ हो कि कोई नेता बिना भाषणबाजी के चुनाव मैदान में उतरा हो। डॉक्टर हाहा-जी पढ़े-लिखे हैं, समाजसेवी हैं, मगर चुनावी दांवपेच से अनभिज्ञ। दूसरी तरफ रवि, ओमप्रकाश और राणा भले ही अनपढ़ हों, लेकिन चुनावी जंग के ये धुरंधर हैं।

ग्रामीण किसे चुनेंगे? सेवाभावी डॉक्टर को या फिर भाषण कला में माहिर नेताओं को?

यह वही सवाल है जो हर किसी के जेहन में कौंध रहा है। कला पंचायत का ये चुनाव वाकई दिलचस्प मोड़ पर आ खड़ा हुआ है।

आगे क्या होगा?

  • क्या डॉक्टर हाहा-जी अपनी सेवाभावना से ग्रामीणों का विश्वास जीत पाएंगे?
  • क्या रवि, ओमप्रकाश और राणा जातिगत वोट बैंक के सहारे जीत हासिल कर लेंगे?

अगली कड़ी में जानिएगा कला पंचायत के चुनाव का रोमांचक नतीजा!

ध्यान दें: यह कहानी मनोरंजन और रोमांच के लिए लिखी गई है। यह पूरी तरह से काल्पनिक है। किसी भी तरह की समानता मात्र संयोग है।

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