लेखक: प्रमोद पांडे
प्रकाशित तिथि: 9 अप्रैल, 2024
गांव: ओरा कला
मुख्य पात्र:
- ओमप्रकाश
- राणा
कहानी:
हमारे गांव, ओरा काला, में विकास की रफ्तार देखकर सभी हैरान हैं। कुछ समय पहले तक तो विकास के नाम पर सिर्फ वादे ही सुनने को मिलते थे। गांव के विकास में सबसे बड़ी रुकावट थी ओमप्रकाश और राणा के बीच की दुश्मनी। दोनों लगातार एक दूसरे के खिलाफ बोलते रहते थे, जिससे पंचायत के काम में भी अड़चनें आती थीं।
पहले तो ये दोनों हर योजना में खामियां निकालते थे। सड़क बने तो कहते थे - "सामान घटिया है, टिकेगी नहीं।" पानी की टंकी बनी तो बोले - "पाइप घटिया हैं, जल्द फट जाएंगे।" , कभी मनरेगा में अच्छा काम नही हुआ है तो कभी लोकपाल चला जाता था शिकायत ले कर तो कभी जिला पदाधिकारी के पास तो कभी अन्य पदाधिकारी..,"
लेकिन पिछले कुछ महीनों से चीजें बदल गई हैं। ओमप्रकाश और राणा अचानक से एक दूसरे से बात करने लगे, फिर साथ दिखाई देने लगे। अब किसी को भी कोई शिकायत नहीं सुनाई देती।
चुचुराहट:
चुचुराहट है कि दोनों ने अपने मनमुटाव को दरकिनार कर लिया है। हालांकि, ये बातचीत कैसे हुई और किसने इन दोनों को मिलाया, यह किसी को नहीं पता। पंचायत के लोग भी इस बारे में चुप्पी साधे हुए हैं।
विकास कार्य:
अब गांव में विकास कार्य तेजी से हो रहे हैं। नालियां साफ हो रहीं हैं, मनरेगा में गुनवाता वाली काम हो रही हैं, आंगनबाड़ी का भी जीर्णोद्धार किया जा रहा है। ये सब देखकर खुशी तो हो रही है, लेकिन मन में एक सवाल भी उठता है - आखिर विकास के काम अब अच्छे से क्यों हो रहे हैं?
क्या वाकई ओमप्रकाश और राणा की दोस्ती का ही कमाल है? या फिर कोई और बात है?
फिलहाल, गांव वालों के पास सिर्फ अटकलें ही हैं। उम्मीद है कि हुआ जो भी हो, गांव का विकास होना अच्छी बात है।
हमें बस इतना ही पता है कि ओमप्रकाश और राणा की अनबन खत्म हुई और गांव का विकास जोरों पर है। बाकी का सच वही जानते हैं जो पर्दे के पीछे रहे!
अगली कड़ी:
क्या आप जानना चाहते हैं कि ओमप्रकाश और राणा के बीच दुश्मनी कैसे खत्म हुई? क्या वाकई उनकी दोस्ती गांव के विकास के पीछे का कारण है?
अगली कड़ी में हम इस रहस्य का खुलासा करेंगे।
टिप्पणी:
यह कहानी पूरी तरह से काल्पनिक है। किसी भी तरह की समानता मात्र संयोग है।
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