काला पंचायत के गांव में सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन में भिन्न अनुभव सामने आ रहे हैं। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) और प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (पीएमजीवाई) जैसी दो महत्वपूर्ण योजनाओं के क्रियान्वयन में गुणवत्ता का अंतर देखने को मिल रहा है, जिसके परिणामस्वरूप समुदाय को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
मनरेगा, जो ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार प्रदान करने और स्थायी विकास को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखता है, अपने कार्यों की उत्कृष्ट गुणवत्ता के लिए प्रशंसा प्राप्त कर रहा है। मनरेगा के तहत किए गए कार्यों ने काला पंचायत में आत्मनिर्भरता के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है। गुणवत्ता और सामुदायिक भागीदारी पर ध्यान केंद्रित करते हुए, मनरेगा की परियोजनाओं ने ग्रामीण विकास के प्रेरणादायक उदाहरण स्थापित किए हैं।
दूसरी ओर, पीएमजीवाई, जो ग्रामीण क्षेत्रों को सड़कों के माध्यम से जोड़ने का उद्देश्य रखती है, सड़क निर्माण की गुणवत्ता में कई कमियों का सामना कर रही है। गरिमापूर्ण इरादों के बावजूद, पीएमजीवाई के तहत निर्मित सड़कों की गुणवत्ता अक्सर निम्न स्तर की होती है, जिसके कारण सड़कें जल्दी खराब हो जाती हैं और ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी होती है।
यह असमानता कई मुद्दों को उजागर करती है:
- कार्यान्वयन में कमी: पीएमजीवाई में गुणवत्ता नियंत्रण और पर्यवेक्षण की कमी, घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग, और भ्रष्टाचार जैसी समस्याएं देखने को मिल रही हैं।
- सामाजिक भागीदारी की कमी: मनरेगा के विपरीत, पीएमजीवाई में समुदाय की भागीदारी कम देखने को मिलती है, जिसके परिणामस्वरूप स्थानीय आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं को अनदेखा किया जाता है।
- जवाबदेही की कमी: पीएमजीवाई में ठेकेदारों और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने में कमी देखने को मिलती है, जिसके कारण गुणवत्ताहीन कार्यों के लिए कोई जिम्मेदार नहीं ठहराया जाता है।
यह आवश्यक है कि पीएमजीवाई में सुधार के लिए ठोस कदम उठाए जाएं:
- कार्यान्वयन में सुधार: गुणवत्ता नियंत्रण और पर्यवेक्षण को मजबूत करना, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना, और बेहतर निर्माण सामग्री का उपयोग करना।
- सामाजिक भागीदारी को बढ़ावा देना: ग्रामीण समुदायों को योजना बनाने और कार्यान्वयन प्रक्रिया में शामिल करना, ताकि स्थानीय आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं को ध्यान में रखा जा सके।
- जवाबदेही तय करना: ठेकेदारों और अधिकारियों को जवाबदेह बनाना, ताकि वे गुणवत्ताहीन कार्यों के लिए जिम्मेदार ठहराए जा सकें।
यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि सभी सरकारी योजनाओं को उच्च गुणवत्ता के साथ लागू किया जाए, ताकि ग्रामीण समुदायों को योजनाओं का पूर्ण लाभ मिल सके।
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