बहुत समय पहले, ऊबड़-खाबड़ पहाड़ों के बीच बसा था, एक छोटा सा गाँव, जिसका नाम था, बरहट। गाँव के लोगों में धीरे-धीरे कानाफूसी होने लगी कि उनके ही बीच कोई साजिश पनप रही है। करीब बारह साल पहले, दो ऐसे लोग जो किसी जुर्म के आरोपी थे, वो एक रात अचानक अपने घर छोड़कर लापता हो गए।
एक दिन, मैंने उनसे उनकी बुआ के बारे में पूछा तो उन्होंने रहस्यमयी ढंग से जवाब दिया, " नेयहर में कुछ काम हैं, इसलिए उन्हें वहाँ ले जा रहे हैं।"
जब भी मैं उनसे उनकी बुआ के बारे में और पूछता, वो टाल-मटोल करने लगते, जिससे मुझे बहुत शक होता। उनके जवाबों में साफ-साफ कुछ छुपाया जा रहा था, जो किसी घिनौने राज की तरफ इशारा कर रहा था।
फिर उनमें से एक आदमी जमुई जिला अदालत में केस नंबर 41/14-15 का हवाला देते हुए शिकायत दर्ज करा देता है, जिसमें वो बुआ पर ये इल्ज़ाम लगाता है कि उसने सारी संपत्ति उसी को सौंप दी है। ये दावा उस समय हममें से किसी ने नहीं सुना था।
पूछताछ गहराई में गई तो एक भयानक साजिश उजागर हुई। दरअसल, वो आरोपी उर्मिला देवी नामक उस बेगुनाह बुआ को धोखा देकर अपने जाल में फंसा चुके थे। उन्होंने झूठे वादों के जाल में फंसाकर उन्हें कहीं दूर ले जाया, उनका खून किया और कोई सबूत न छूटे, इसलिए उनकी लाश भी गायब कर दी।
जब उनसे उर्मिला देवी के बारे में पूछा जाता तो वो चुप्पी साधे रहते, कुछ भी बताने से इनकार करते। गाँववालों ने भी उनसे पूछताछ की पर उनका केवल यही जवाब था, चुप्पी।
मेरे लिए ये बिल्कुल साफ था कि वो आरोपी कितनी सोच-समझकर इस पूरे अपराध को अंजाम दिए थे। उन्होंने उर्मिला देवी को अपने जाल में फंसाया और उनकी मौत का कारण बने।
आखिरकार सच सामने आया, जिसने उन आरोपियों के धोखेबाज कामों और मानव जीवन की कितनी कम परवाह करते थे, उसे पूरी दुनिया के सामने उजागर कर दिया। ये घटना हमें याद दिलाती है कि इंसान के दिल में कितना अंधेरा छिपा होता है, जो स्वार्थी इच्छाओं को पूरा करने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।
हालांकि ये कहानी काल्पनिक है, पर ये मानवीय भावनाओं और उनके खौफनाक अंजामों की एक सच्ची झलक दिखाती है। ये हमें सतर्क रहने और दूसरों के साथ दया और ईमानदारी से पेश आने की सीख देती है, ताकि हम भी इस कहानी में आए उस अंधेरे का शिकार ना बनें।
उपरोक्त कहानी के बारे में अस्वीकरण:
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