2024 के चुनावों की सबसे बड़ी खबर: सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार द्वारा लाई गई इलेक्टोरल बॉन्ड योजना को असंवैधानिक घोषित कर दिया है। यह फैसला देर से आया, लेकिन यह एक ऐतिहासिक फैसला है जो लोकतंत्र की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
चुनावों में पारदर्शिता की कमी: इलेक्टोरल बॉन्ड योजना को चुनावों में पारदर्शिता लाने के लिए लाया गया था। लेकिन, यह योजना वास्तव में धन के अज्ञात स्रोतों से राजनीतिक दलों को फंडिंग करने का एक तरीका बन गई थी।
चुनावी बॉन्ड योजना के खिलाफ आरोप: इस योजना के खिलाफ कई आरोप लगाए गए थे, जिनमें शामिल हैं:
- धन के अज्ञात स्रोत: यह योजना गुमनाम तरीके से राजनीतिक दलों को दान करने की अनुमति देती थी, जिससे धन के स्रोतों का पता लगाना मुश्किल हो जाता था।
- बड़े उद्योगपतियों का प्रभाव: यह योजना बड़े उद्योगपतियों और कंपनियों को राजनीतिक दलों पर अनुचित प्रभाव डालने की अनुमति देती थी।
- लोकतंत्र को खतरा: यह योजना लोकतंत्र को खतरा पैदा करती थी क्योंकि यह चुनावों को पैसे के बल पर जीतने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देती थी।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला: सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी आरोपों को सही माना और इलेक्टोरल बॉन्ड योजना को असंवैधानिक घोषित कर दिया। यह फैसला लोकतंत्र की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
फैसले के बाद की स्थिति: इस फैसले के बाद, राजनीतिक दलों को फंडिंग करने के लिए एक नई प्रणाली की आवश्यकता होगी। यह प्रणाली पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए ताकि चुनावों में सभी दलों को समान अवसर मिल सके।
निष्कर्ष: सुप्रीम कोर्ट का फैसला एक ऐतिहासिक फैसला है जो लोकतंत्र को मजबूत करने में मदद करेगा। यह फैसला चुनावों में धन के अज्ञात स्रोतों के प्रभाव को कम करने और सभी दलों को समान अवसर प्रदान करने में मदद करेगा।
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