Tuesday, February 27, 2024

प्रस्ताव के बाद शादी ना करना धोखा नहीं, जब तक कि धोखा देने का इरादा न हो: सुप्रीम कोर्ट


हाल ही में, सर्वोच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति द्वारा विवाह का प्रस्ताव देना और बाद में उस प्रस्ताव को स्वीकार करने के बाद शादी से इनकार करना, धोखाधड़ी का मामला नहीं बनता - जब तक कि प्रस्ताव देने वाले व्यक्ति की最初から (शुरुआत से) धोखा देने की नियत न हो।

यह फैसला कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली अपील पर आया था। हाईकोर्ट ने एक मामले में फैसला सुनाया था कि एक व्यक्ति जो शादी का प्रस्ताव देता है और बाद में उस प्रस्ताव को टाल देता है, धोखाधड़ी का दोषी है।

सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि विवाह का प्रस्ताव देना और उसे स्वीकार करना एक व्यक्तिगत मामला है। कोर्ट ने यह भी कहा कि कई कारणों से विवाह का प्रस्ताव रद्द हो सकता है, और केवल इस वजह से किसी व्यक्ति पर धोखाधड़ी का आरोप नहीं लगाया जा सकता।

हालांकि, कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि अगर किसी व्यक्ति ने शादी का झूठा वादा करके किसी को धोखा देने की नियत से प्रस्ताव दिया है, तो वह धोखाधड़ी का दोषी हो सकता है। ऐसे मामलों में सबूतों के आधार पर कार्रवाई की जा सकती है।

सर्वोच्च न्यायालय का यह फैसला महत्वपूर्ण है क्योंकि यह स्पष्ट करता है कि विवाह का प्रस्ताव स्वीकार करने के बाद शादी से इनकार करना, धोखाधड़ी का अपराध नहीं है। हालांकि, अगर धोखा देने की मंशा साबित हो जाए तो कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

No comments: