"पोस्टमार्टम तो हो रहा है, पर MLC क्यों नहीं दर्ज किया जा रहा?"
जमुई जिले के सदर अस्पताल में एक चिंताजनक स्थिति उत्पन्न हो गई है जहाँ मृतकों का पोस्टमार्टम तो किया जा रहा है, लेकिन मेडिको-लीगल केस (MLC) दर्ज नहीं किया जा रहा। यह स्थिति न केवल कानूनी प्रक्रियाओं का उल्लंघन है, बल्कि मृतक के परिवारजनों के साथ होने वाले न्याय में भी बाधक है।
मौजूदा व्यवस्था में खामियाँ
अपूर्ण दस्तावेजीकरण: पोस्टमार्टम रिपोर्ट जारी की जाती है, लेकिन उसमें MLC संख्या का उल्लेख नहीं होता।
पुलिस और अस्पताल के बीच समन्वय का अभाव: हालांकि पुलिस मामला दर्ज कर लेती है, पर अस्पताल द्वारा MLC दर्ज न करने से कानूनी प्रक्रिया अधूरी रह जाती है।
परिवारों को भ्रम की स्थिति: परिजनों को लगता है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद सब कुछ पूरा हो गया, जबकि MLC के बिना मामला कानूनी तौर पर अपूर्ण माना जाता है।
इसके गंभीर परिणाम
✔ कानूनी जटिलताएँ: बीमा दावे, संपत्ति हस्तांतरण और कानूनी निपटान में देरी।
✔ अपराधियों को छूट का जोखिम: यदि मृत्यु किसी आपराधिक घटना का परिणाम है, तो MLC न होने से जाँच प्रभावित होती है।
✔ पारदर्शिता का अभाव: अस्पताल और पुलिस प्रशासन के बीच समन्वयहीनता से पारदर्शिता खत्म होती है।
क्या कहता है कानून?
भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 174: किसी भी अप्राकृतिक मृत्यु की सूचना पुलिस को देना और MLC दर्ज करना अनिवार्य है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश (2016): "हर अस्पताल को यह सुनिश्चित करना होगा कि अप्राकृतिक मौतों को MLC के तहत दर्ज किया जाए।"
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के दिशा-निर्देश: "MLC के बिना पोस्टमार्टम रिपोर्ट को अधूरा माना जाएगा।"
नागरिक क्या कर सकते हैं?
पोस्टमार्टम रिपोर्ट की प्रति लें और MLC नंबर की पुष्टि करें।
यदि MLC नहीं दिया गया है, तो अस्पताल के मेडिकल रिकॉर्ड विभाग से लिखित में अनुरोध करें।
शिकायत दर्ज करें:
जिला स्वास्थ्य अधिकारी (CMO) को लिखित शिकायत भेजें।
स्वास्थ्य विभाग की हेल्पलाइन (104) पर संपर्क करें।
RTI दायर करें:
"पिछले 6 महीनों में कितने MLC केस दर्ज किए गए?"
"कितने पोस्टमार्टम केस में MLC नहीं दर्ज हुआ?"
प्रमोद कुमार पांडेय ने संबंधित विभागों को पत्र लिखा
RTI कार्यकर्ता प्रमोद कुमार पांडेय ने इस गंभीर प्रशासनिक लापरवाही को लेकर स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन, और पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखा है। उन्होंने पत्र में यह स्पष्ट किया कि यदि अस्पताल में MLC रिपोर्ट दर्ज नहीं की जा रही है, तो यह न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि परिवारों के न्याय के अधिकार का हनन भी है।
पत्र में यह माँग की गई है कि:
- जमुई सदर अस्पताल में MLC प्रक्रिया की जाँच की जाए।
- पिछले 6 महीनों के सभी अप्राकृतिक मृत्यु के मामलों में MLC दर्ज करने की स्थिति की समीक्षा की जाए।
- भविष्य में MLC दर्ज न करने वाले अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई की जाए।
यदि इस विषय पर उचित कार्रवाई नहीं की जाती है, तो यह मामला मानवाधिकार आयोग और उच्च न्यायालय तक ले जाया जाएगा।
निष्कर्ष
जमुई सदर अस्पताल को तत्काल MLC प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करना चाहिए। यदि यह लापरवाही जारी रहती है, तो उच्च स्तर पर हस्तक्षेप की आवश्यकता होगी ताकि कानूनी प्रक्रियाओं का सही ढंग से पालन हो सके।
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अस्वीकरण (Disclaimer)
यह ब्लॉग केवल जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें प्रस्तुत सभी तथ्य, घटनाएँ और विश्लेषण उपलब्ध स्रोतों, व्यक्तिगत अनुभवों, और जनहित में प्राप्त सूचनाओं पर आधारित हैं।
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- यदि किसी तथ्य में सुधार की आवश्यकता है या कोई अतिरिक्त प्रमाण उपलब्ध है, तो संबंधित अधिकारी या व्यक्ति वास्तविक दस्तावेज़ प्रस्तुत कर सकते हैं।
- यह ब्लॉग किसी भी कानूनी या प्रशासनिक प्रक्रिया का आधिकारिक दस्तावेज़ नहीं है। पाठकों को किसी भी कार्रवाई से पहले विधिक विशेषज्ञों या संबंधित सरकारी विभागों से परामर्श करने की सलाह दी जाती है।
ब्लॉगर: प्रमोद कुमार पांडेय
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