जैसा कि आप इस फोटो में देख सकते हैं, यह फोटो NMMS (National Mobile Monitoring System) पर अपलोड की गई है। फोटो में एक मनरेगा मजदूर को फॉर्मल ड्रेस में देखा जा सकता है। अरे भई, ये क्या है? क्या ये मजदूर हैं या किसी मल्टीनेशनल कंपनी के CEO? शर्ट-पैंट पहने, टाई लगाए, जैसे कोई बोर्ड मीटिंग में जाने को तैयार हो! ये दृश्य देखकर तो यही लगता है कि बलथर पंचायत, सोनो तालुका जमुई में मनरेगा ने एक नया ट्रेंड शुरू कर दिया है - "ड्रेस टू इंप्रेस, वर्क लेस!"
फोटो में साफ दिख रहा है कि मजदूर का पहनावा और उसकी स्थिति मनरेगा जैसे शारीरिक श्रम के काम के अनुरूप नहीं है। ये तो वाकई में एक मजाक लगता है! क्या ये फोटो वास्तविक है या फिर फर्जी उपस्थिति दर्ज करने के लिए खींची गई है? अगर ये फर्जी है, तो ये तो उस मशहूर जोक जैसा है - "काम नहीं करना, बस फोटो खिंचवाना!"
कार्य का विवरण:
- कार्य कोड (Work Code): 0550001/RC/20792786
- कार्य का नाम (Work Name): ग्राम बलथर ग्रामीण सड़क से शिव मंदिर तक पेवर ब्लॉक निर्माण
- एमएसआर नंबर (Msr No.): 22219
इस कार्य से जुड़े मजदूरों की उपस्थिति और कार्य की गुणवत्ता पर सख्त निगरानी की जरूरत है। अगर ये फोटो फर्जी है, तो ये तो उस मशहूर जोक जैसा है - "हम काम नहीं करते, बस काम दिखाते हैं!"
मनरेगा जैसी योजनाएं ग्रामीण विकास और रोजगार सृजन के लिए बनाई गई हैं। इनमें किसी भी प्रकार की गड़बड़ी न केवल सरकारी संसाधनों की बर्बादी है, बल्कि गरीब मजदूरों के हकों की अनदेखी भी है। आइए, हम सभी मिलकर ऐसे कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करें।
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