सोनो,बलथर पंचायत, जो जमुई जिले के सोनो प्रखंड का हिस्सा है, में वित्तीय वर्ष 2024-2025 के दौरान महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (नरेगा) के तहत विभिन्न विकास कार्यों पर भारी मात्रा में खर्च किया गया है। इस वर्ष कुल ₹12,020,843 (एक करोड़ बीस लाख बीस हजार आठ सौ तैंतालीस रुपये) खर्च किए गए, जिसमें कई परियोजनाएं शामिल थीं—पेड़ लगाना, जल संरक्षण कार्य, और ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाना।
लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह सामने आई है कि इस ग्रैंड टोटल का एक बड़ा हिस्सा तालाब निर्माण, आहर और पोखर निर्माण जैसे जल संरक्षण कार्यों में लगाया गया है।
तालाब, आहर और पोखर निर्माण पर कितना खर्च हुआ?
वित्तीय वर्ष 2024-2025 में सोनो प्रखंड के दस्तावेजों के अनुसार, तालाब निर्माण, आहर और खेत पोखर निर्माण पर ₹7,166,490 (सत्तर लाख सोलह हजार चार सौ नब्बे रुपये) खर्च किए गए। यह कुल खर्च का लगभग 60% हिस्सा है, जो यह दर्शाता है कि बलथर पंचायत और आसपास के क्षेत्रों में जल संरक्षण और सिंचाई सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
इन कार्यों में निम्नलिखित प्रमुख परियोजनाएं शामिल रहीं—
- खेत पोखर निर्माण – किसानों की निजी जमीनों पर छोटे पोखरों का निर्माण, जिससे सिंचाई और जल संचयन में मदद मिलती है।
- तालाब निर्माण – पंचायत के सरकारी और गैर-मजरुआ जमीनों पर बड़े तालाबों का निर्माण, जिससे सामुदायिक जल संग्रहण सुनिश्चित किया जा सके।
- आहर सुधार – पारंपरिक जल संरचनाओं की मरम्मत और जीर्णोद्धार, जिससे सिंचाई की सुविधा बेहतर हो सके।
जनता का सवाल: इतना पैसा सिर्फ इन्हीं परियोजनाओं पर क्यों?
₹7,166,490 (सत्तर लाख सोलह हजार चार सौ नब्बे रुपये) का यह निवेश पंचायत की जल संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। ये परियोजनाएं बारिश के पानी को संग्रहित करने और सूखे के समय किसानों के लिए जीवन रेखा साबित होती हैं। इसके साथ ही, इन कार्यों ने अकुशल श्रमिकों को रोजगार देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
लेकिन जनता के मन में एक बड़ा सवाल है—
"इतना पैसा सिर्फ तालाब, आहर और पोखर निर्माण पर ही क्यों खर्च किया जा रहा है? क्या अन्य जरूरी विकास कार्यों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा?"
लोगों की यह भी चिंता है कि क्या पंचायत विकास कार्यों को केवल जल संरक्षण तक ही सीमित कर रही है? क्या शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क निर्माण जैसी अन्य महत्वपूर्ण जरूरतों को नजरअंदाज किया जा रहा है?
क्या पूरे जमुई जिले में यही हाल है?
यह स्थिति सिर्फ बलथर पंचायत तक सीमित नहीं है; बल्कि पूरे जमुई जिले की यही हालत है। अधिकांश पंचायतें नरेगा के तहत तालाब, आहर और बांध जैसे निर्माण कार्यों पर ही फोकस कर रही हैं।
यह एक महत्वपूर्ण सवाल उठाता है—
- क्या ये योजनाएं इसलिए प्राथमिकता में हैं क्योंकि वे आसानी से दिखने वाली परियोजनाएं हैं?
- क्या इनसे तत्काल रोजगार उपलब्ध होता है, इसलिए इन्हें प्राथमिकता दी जा रही है?
- क्या सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरतों को नजरअंदाज किया जा रहा है?
यह स्पष्ट है कि पंचायतें जिस तरह से पैसा खर्च कर रही हैं, उसमें संतुलन की कमी दिखती है।
निष्कर्ष
बलथर पंचायत में वित्तीय वर्ष 2024-2025 के दौरान कुल खर्च ₹12,020,843 (एक करोड़ बीस लाख बीस हजार आठ सौ तैंतालीस रुपये) में से ₹7,166,490 (सत्तर लाख सोलह हजार चार सौ नब्बे रुपये) सिर्फ तालाब, आहर और पोखर निर्माण पर खर्च किए गए।
यह प्रशासन की जल संरक्षण और ग्रामीण रोजगार को प्राथमिकता देने की नीति को दर्शाता है। हालांकि, यह भी स्पष्ट है कि जनता के मन में संदेह और सवाल हैं। पंचायतों को चाहिए कि वे अन्य जरूरी विकास कार्यों पर भी ध्यान दें, ताकि पूरे जिले का संतुलित और समग्र विकास सुनिश्चित किया जा सके।
अस्वीकरण (Disclaimer):
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