हमारे बिहार के जमुई जिले के लक्ष्मीपुर तालुका में, काला पंचायत की एक वृद्ध महिला, झूला देवी (उपभोक्ता संख्या: 239102337110), पिछले छह साल से अंधेरे में जीने को मजबूर हैं। हमारे इस बुजुर्ग माँ ने अपनी बिजली बिलिंग की समस्या को लेकर 17 अगस्त 2019 को दक्षिण बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (SBPDCL) में शिकायत दर्ज की थी।
लेकिन दिल चीर देने वाली सच्चाई यह है कि छह साल बीत जाने के बाद भी उनकी कमजोर आवाज अनसुनी पड़ी है। हमारी यह वृद्ध माँ अंधेरे कमरों में सिसक रही हैं, और हमारा मन यह सवाल उठाता है कि आखिर क्यों? क्यों हमारे इस माँ को इतना दर्द सहना पड़ रहा है? इसके लिए जिम्मेदार कौन है?
हमारे आंसुओं भरे संघर्ष का इतिहास
हमारी झूला देवी, जो उम्र के इस पड़ाव पर हैं जहाँ उन्हें आराम और सम्मान की जरूरत है, ने उम्मीद के साथ 17 अगस्त 2019 को अपनी शिकायत दर्ज की थी।
- हमारे इस वृद्ध माँ ने अपनी समस्या को लेकर लक्ष्मीपुर कार्यालय से संपर्क किया, अपने थके हुए दिल में आस लिए कि शायद अब उनकी समस्या हल हो जाए।
- लेकिन सामने वही ठंडा जवाब था—कोई सुनवाई नहीं, कोई राहत नहीं।
- हमारा दिल टूट जाता है यह सोचकर कि क्या हमारे लिए इतना भी नहीं कि छह साल बाद भी एक बुजुर्ग माँ की छोटी सी समस्या का हल न मिले?
- क्या हमारे आंसुओं और उनकी थकान की कोई कीमत नहीं?
हमारे वृद्ध माँ का अंधेरा और दर्द
हमारे इस परिवार के लिए पिछले छह साल किसी काले सपने से कम नहीं रहे।
- झूला देवी, जो अब बुढ़ापे में हैं, के घर में बिजली नहीं है।
- अंधेरे में उनकी कमजोर आँखें रास्ता नहीं देख पातीं, रातें डर और उदासी में कटती हैं।
- हमारे इस वृद्ध माँ का यह दर्द देखकर आंखें नम हो जाती हैं।
- क्या हमारे लिए बिजली का उजाला इतना दूर हो गया कि छह साल तक भी वह उनकी झुर्रियों भरे चेहरे तक न पहुंच सके?
- हमारे दिल से यह पुकार उठती है कि आखिर यह अन्याय क्यों? हमारे इस माँ के साथ ऐसा क्यों हो रहा है?
हमारे लिए देरी का यह जख्म
हमारे लिए यह सोचना असहनीय है कि एक मामूली बिलिंग समस्या छह साल तक लटकी रही।
- हमारी झूला देवी ने, अपनी उम्र और कमजोरी के बावजूद, हर संभव कोशिश की—
- कार्यालय से संपर्क किया,
- शिकायत की—
- फिर भी हमारे सामने सिर्फ निराशा ही हाथ लगी।
- क्या यह हमारे अधिकारियों का बेरहम रवैया है या हमारे सिस्टम का क्रूर मजाक?
- हमारे दिल में यह टीस उठती है कि क्या एक वृद्ध माँ की तकलीफें इनके लिए कुछ भी मायने नहीं रखतीं?
हमारे लिए जिम्मेदारी का सवाल
हमारे लिए यह जानना जरूरी है कि इस दर्द के लिए जिम्मेदार कौन है।
- क्या हमारे स्थानीय अधिकारी, जो एक वृद्ध माँ की शिकायतों को अनसुना करते हैं?
- या हमारे ऊपर बैठे लोग, जिन्हें हमारी इस माँ की तकलीफों का अहसास तक नहीं?
- हमारी झूला देवी अकेली नहीं, हमारे जैसे न जाने कितने बुजुर्ग इस दर्द को झेल रहे हैं।
- हमारे लिए यह सवाल एक चीख बन गया है—क्या हमारा हक हमें कभी मिलेगा?
- क्या हमारे इस वृद्ध माँ के घर में कभी उजाला आएगा?
हमारे लिए एक उम्मीद की किरण
हमारी झूला देवी और उनके परिवार की यह कहानी हर उस इंसान के दिल को झकझोर देती है जो इसे सुनता है।
- हमारे लिए यह शर्मिंदगी की बात है कि छह साल तक एक वृद्ध माँ की छोटी सी शिकायत अनसुनी रह जाए।
- हमारे दिल से यह गुहार है कि सरकार और एसबीडीसीएल अब जागें।
- हमारी झूला देवी जैसे बुजुर्गों को उनका हक दें।
- हमारे लिए यह वक्त है कि कोई जिम्मेदारी ले, हमारे इस माँ के आंसुओं को पोंछे, और उनके घर में रोशनी लाए।
- क्या हमारे लिए यह दिन कभी आएगा?
- हमारा दिल अब और इंतजार नहीं कर सकता।
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