Saturday, March 29, 2025

बलथर पंचायत: घोटालों और भ्रष्टाचार के दलदल में फंसी!


📍 जमुई, बिहार | 29 मार्च 2025


बलथर पंचायत में भ्रष्टाचार चरम पर!

बलथर पंचायत का बुरा समय खत्म होने का नाम नहीं ले रहा हैमनरेगा में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा और भ्रष्टाचार की खबरों के बीच, अब प्रधानमंत्री आवास योजना में भी रिश्वतखोरी का मामला सामने आया है। यहां के निवासियों का सरकारी योजनाओं पर से भरोसा उठता जा रहा है


🔹 मनरेगा घोटाला: NMMS ऐप पर फर्जीवाड़ा

बलथर पंचायत में मनरेगा के तहत NMMS (National Mobile Monitoring System) ऐप के जरिए फर्जी नाम और फोटो के सहारे मजदूरी की लूट हो रही है।

क्या चल रहा है घोटाला?

  • असली मजदूरों को काम के बावजूद भुगतान नहीं मिल रहा
  • फर्जी उपस्थिति दर्ज कर पैसों की बंदरबांट की जा रही है
  • एक ही फोटो को कई बार अलग-अलग नामों से अपलोड किया जा रहा है

📌 जिला प्रशासन इस मामले पर मौन धारण किए हुए है


🔹 आवास योजना में रिश्वतखोरी

प्रधानमंत्री आवास योजना में भी भ्रष्टाचार का एक नया मामला सामने आया है

📹 वीडियो में रिश्वत लेते पकड़े गए अधिकारी
बलथर पंचायत में आवास सहायक गुंजन कुमार को घूस लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया

  • वायरल वीडियो में वह बलथर गांव निवासी बालेश्वर रविदास के बेटे संतोष कुमार दास से अवैध रूप से पैसे लेते दिखे
  • मामला सामने आते ही जमुई की डीएम अभिलाषा शर्मा ने आरोपी को सेवा से बर्खास्त कर दिया

🔹 प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

पंचायत में लगातार घोटाले और भ्रष्टाचार के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है

⚠️ स्थानीय निवासियों का आरोप:

  • कई बार शिकायत दर्ज कराने के बावजूद अधिकारियों ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया
  • सरकारी फंड का दुरुपयोग हो रहा है और गरीबों का हक मारा जा रहा है

🔹 क्या होगा आगे?

जिला प्रशासन ने आवास योजना में रिश्वतखोरी के मामले में तुरंत कार्रवाई की है
❌ लेकिन मनरेगा घोटाले पर अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया

📢 जनता की मांग:
🔹 इस मामले की तत्काल जांच हो
🔹 दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए


📢 जनता की आवाज बनें!

इस खबर को शेयर करें ताकि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सके!

#बलथर_पंचायत #मनरेगा_घोटाला #आवास_योजना_रिश्वत #भ्रष्टाचार #न्याय

Thursday, March 27, 2025

छः साल में आदमी परिवार वाला बन जाता है, लेकिन SBPDCL एक शिकायत भी नहीं सुलझा पाया?

जमुई, बिहार: छः साल में बहुत कुछ बदल सकता है। एक मस्तमौला कुंवारा शादी कर सकता है, पिता बन सकता है, EMI और स्कूल फीस के चक्कर में पड़ सकता है। लेकिन इतने ही सालों में, SBPDCL एक साधारण बिजली की शिकायत तक नहीं सुलझा पाया!

ऐसा लगता है कि SBPDCL किसी और टाइमजोन में काम करता है—जहाँ छः साल शिकायत हल करने के लिए बहुत कम, लेकिन फर्जी बिल भेजने के लिए काफी होते हैं।


छः साल से अंधेरे में जिंदगी

काला पंचायत, लक्ष्मीपुर की उपभोक्ता झूला देवी (उपभोक्ता संख्या: 239102337110) ने 17 अगस्त 2019 को बिजली कनेक्शन और बिलिंग की समस्या को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी। आज मार्च 2025 है, और समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है।

इस बीच, इन छः सालों में:
✔️ लोग कुंवारे से शादीशुदा और फिर माँ-बाप बन चुके हैं।
✔️ 2019 में जन्मे बच्चे अब पहली कक्षा में पढ़ रहे हैं।
✔️ मोबाइल नेटवर्क 4G से 5G हो चुका है।
✔️ यहाँ तक कि बिहार की सड़कें भी इससे पहले बन जाती हैं!
✔️ लेकिन SBPDCL अभी भी ‘Pending’ मोड में अटका हुआ है।


SBPDCL: "आएंगे… देखेंगे… भूल जाएंगे!"

बिजली कोई ऐशो-आराम की चीज़ नहीं, बल्कि मूलभूत जरूरत है। लेकिन SBPDCL का रवैया कुछ और ही कहता है।

स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता और ब्लॉगर प्रमोद कुमार पांडेय सवाल उठाते हैं:
"अगर छः साल में कोई आदमी शादी करके पिता बन सकता है, तो SBPDCL एक बिजली की शिकायत क्यों नहीं सुलझा सकता?"


कहीं ये कहानी कभी खत्म ही ना हो जाए?

बिजली उपभोक्ताओं की शिकायतों के समाधान के लिए Consumer Grievance Redressal Forum (CGRF) बनाया गया है। लेकिन छः साल की चुप्पी देखकर झूला देवी सोचने लगी हैं कि अब उन्हें सोलर पैनल खरीद लेना चाहिए, मोमबत्ती जलाने की आदत डाल लेनी चाहिए, या फिर हमेशा के लिए अंधेरे को ही अपना नसीब मान लेना चाहिए?

अब शिकायत को बिजली लोकपाल (Electricity Ombudsman) के पास ले जाने की तैयारी है। लेकिन एक डर अब भी बाकी है—"क्या इसे हल करने में और छः साल लगेंगे?"


SBPDCL, सुन रहे हो?

जब नए शादीशुदा जोड़े अपना भविष्य प्लान कर रहे हैं और 2019 में पैदा हुए बच्चे A, B, C, D लिखना सीख रहे हैं, SBPDCL अब भी ‘Pending’ पेज को घूर रहा है।

छः साल किसी का घर बसाने के लिए काफी हैं, तो SBPDCL के लिए एक बल्ब जलाने के लिए क्यों नहीं?

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(अगर आपके साथ भी ऐसा हुआ है, तो बिजली लोकपाल, बिहार में शिकायत दर्ज कराएं: http://berc.co.in. लेकिन हाँ, संतों वाली धैर्यशक्ति साथ लाना न भूलें! 😅)

एसबीडीसीएल लक्ष्मीपुर तालुका, जमुई जिला, बिहार: काला पंचायत की वृद्ध महिला उपभोक्ता के प्रति गैर-जिम्मेदाराना रवैया


हमारे बिहार के जमुई जिले के लक्ष्मीपुर तालुका में, काला पंचायत की एक वृद्ध महिला, झूला देवी (उपभोक्ता संख्या: 239102337110), पिछले छह साल से अंधेरे में जीने को मजबूर हैं। हमारे इस बुजुर्ग माँ ने अपनी बिजली बिलिंग की समस्या को लेकर 17 अगस्त 2019 को दक्षिण बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (SBPDCL) में शिकायत दर्ज की थी।

लेकिन दिल चीर देने वाली सच्चाई यह है कि छह साल बीत जाने के बाद भी उनकी कमजोर आवाज अनसुनी पड़ी है। हमारी यह वृद्ध माँ अंधेरे कमरों में सिसक रही हैं, और हमारा मन यह सवाल उठाता है कि आखिर क्यों? क्यों हमारे इस माँ को इतना दर्द सहना पड़ रहा है? इसके लिए जिम्मेदार कौन है?


हमारे आंसुओं भरे संघर्ष का इतिहास

हमारी झूला देवी, जो उम्र के इस पड़ाव पर हैं जहाँ उन्हें आराम और सम्मान की जरूरत है, ने उम्मीद के साथ 17 अगस्त 2019 को अपनी शिकायत दर्ज की थी।

  • हमारे इस वृद्ध माँ ने अपनी समस्या को लेकर लक्ष्मीपुर कार्यालय से संपर्क किया, अपने थके हुए दिल में आस लिए कि शायद अब उनकी समस्या हल हो जाए।
  • लेकिन सामने वही ठंडा जवाब थाकोई सुनवाई नहीं, कोई राहत नहीं
  • हमारा दिल टूट जाता है यह सोचकर कि क्या हमारे लिए इतना भी नहीं कि छह साल बाद भी एक बुजुर्ग माँ की छोटी सी समस्या का हल न मिले?
  • क्या हमारे आंसुओं और उनकी थकान की कोई कीमत नहीं?

हमारे वृद्ध माँ का अंधेरा और दर्द

हमारे इस परिवार के लिए पिछले छह साल किसी काले सपने से कम नहीं रहे।

  • झूला देवी, जो अब बुढ़ापे में हैं, के घर में बिजली नहीं है
  • अंधेरे में उनकी कमजोर आँखें रास्ता नहीं देख पातीं, रातें डर और उदासी में कटती हैं
  • हमारे इस वृद्ध माँ का यह दर्द देखकर आंखें नम हो जाती हैं
  • क्या हमारे लिए बिजली का उजाला इतना दूर हो गया कि छह साल तक भी वह उनकी झुर्रियों भरे चेहरे तक न पहुंच सके?
  • हमारे दिल से यह पुकार उठती है कि आखिर यह अन्याय क्यों? हमारे इस माँ के साथ ऐसा क्यों हो रहा है?

हमारे लिए देरी का यह जख्म

हमारे लिए यह सोचना असहनीय है कि एक मामूली बिलिंग समस्या छह साल तक लटकी रही

  • हमारी झूला देवी ने, अपनी उम्र और कमजोरी के बावजूद, हर संभव कोशिश की
    • कार्यालय से संपर्क किया,
    • शिकायत की—
    • फिर भी हमारे सामने सिर्फ निराशा ही हाथ लगी
  • क्या यह हमारे अधिकारियों का बेरहम रवैया है या हमारे सिस्टम का क्रूर मजाक?
  • हमारे दिल में यह टीस उठती है कि क्या एक वृद्ध माँ की तकलीफें इनके लिए कुछ भी मायने नहीं रखतीं?

हमारे लिए जिम्मेदारी का सवाल

हमारे लिए यह जानना जरूरी है कि इस दर्द के लिए जिम्मेदार कौन है

  • क्या हमारे स्थानीय अधिकारी, जो एक वृद्ध माँ की शिकायतों को अनसुना करते हैं?
  • या हमारे ऊपर बैठे लोग, जिन्हें हमारी इस माँ की तकलीफों का अहसास तक नहीं?
  • हमारी झूला देवी अकेली नहीं, हमारे जैसे न जाने कितने बुजुर्ग इस दर्द को झेल रहे हैं
  • हमारे लिए यह सवाल एक चीख बन गया हैक्या हमारा हक हमें कभी मिलेगा?
  • क्या हमारे इस वृद्ध माँ के घर में कभी उजाला आएगा?

हमारे लिए एक उम्मीद की किरण

हमारी झूला देवी और उनके परिवार की यह कहानी हर उस इंसान के दिल को झकझोर देती है जो इसे सुनता है।

  • हमारे लिए यह शर्मिंदगी की बात है कि छह साल तक एक वृद्ध माँ की छोटी सी शिकायत अनसुनी रह जाए
  • हमारे दिल से यह गुहार है कि सरकार और एसबीडीसीएल अब जागें
  • हमारी झूला देवी जैसे बुजुर्गों को उनका हक दें
  • हमारे लिए यह वक्त है कि कोई जिम्मेदारी ले, हमारे इस माँ के आंसुओं को पोंछे, और उनके घर में रोशनी लाए
  • क्या हमारे लिए यह दिन कभी आएगा?
  • हमारा दिल अब और इंतजार नहीं कर सकता।

आपका समर्थन जरूरी है!

अगर आप झूला देवी और हजारों अन्य बुजुर्गों के हक की इस लड़ाई में साथ देना चाहते हैं, तो इस मुद्दे को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचाएँ

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👉 एसबीडीसीएल और संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगें।
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हमारी आवाज ही हमारी ताकत है!

Tuesday, March 25, 2025

सोनो बलथर पंचायत में वित्तीय वर्ष 2024-2025: तालाब, आहर और पोखर निर्माण पर खर्च का विश्लेषण




सोनो,बलथर पंचायत, जो जमुई जिले के सोनो प्रखंड का हिस्सा है, में वित्तीय वर्ष 2024-2025 के दौरान महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (नरेगा) के तहत विभिन्न विकास कार्यों पर भारी मात्रा में खर्च किया गया है। इस वर्ष कुल ₹12,020,843 (एक करोड़ बीस लाख बीस हजार आठ सौ तैंतालीस रुपये) खर्च किए गए, जिसमें कई परियोजनाएं शामिल थीं—पेड़ लगाना, जल संरक्षण कार्य, और ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाना।

लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह सामने आई है कि इस ग्रैंड टोटल का एक बड़ा हिस्सा तालाब निर्माण, आहर और पोखर निर्माण जैसे जल संरक्षण कार्यों में लगाया गया है।


तालाब, आहर और पोखर निर्माण पर कितना खर्च हुआ?

वित्तीय वर्ष 2024-2025 में सोनो प्रखंड के दस्तावेजों के अनुसार, तालाब निर्माण, आहर और खेत पोखर निर्माण पर ₹7,166,490 (सत्तर लाख सोलह हजार चार सौ नब्बे रुपये) खर्च किए गए। यह कुल खर्च का लगभग 60% हिस्सा है, जो यह दर्शाता है कि बलथर पंचायत और आसपास के क्षेत्रों में जल संरक्षण और सिंचाई सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

इन कार्यों में निम्नलिखित प्रमुख परियोजनाएं शामिल रहीं—

  • खेत पोखर निर्माण – किसानों की निजी जमीनों पर छोटे पोखरों का निर्माण, जिससे सिंचाई और जल संचयन में मदद मिलती है।
  • तालाब निर्माण – पंचायत के सरकारी और गैर-मजरुआ जमीनों पर बड़े तालाबों का निर्माण, जिससे सामुदायिक जल संग्रहण सुनिश्चित किया जा सके।
  • आहर सुधार – पारंपरिक जल संरचनाओं की मरम्मत और जीर्णोद्धार, जिससे सिंचाई की सुविधा बेहतर हो सके।

जनता का सवाल: इतना पैसा सिर्फ इन्हीं परियोजनाओं पर क्यों?

₹7,166,490 (सत्तर लाख सोलह हजार चार सौ नब्बे रुपये) का यह निवेश पंचायत की जल संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। ये परियोजनाएं बारिश के पानी को संग्रहित करने और सूखे के समय किसानों के लिए जीवन रेखा साबित होती हैं। इसके साथ ही, इन कार्यों ने अकुशल श्रमिकों को रोजगार देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

लेकिन जनता के मन में एक बड़ा सवाल है—

"इतना पैसा सिर्फ तालाब, आहर और पोखर निर्माण पर ही क्यों खर्च किया जा रहा है? क्या अन्य जरूरी विकास कार्यों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा?"

लोगों की यह भी चिंता है कि क्या पंचायत विकास कार्यों को केवल जल संरक्षण तक ही सीमित कर रही है? क्या शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क निर्माण जैसी अन्य महत्वपूर्ण जरूरतों को नजरअंदाज किया जा रहा है?


क्या पूरे जमुई जिले में यही हाल है?

यह स्थिति सिर्फ बलथर पंचायत तक सीमित नहीं है; बल्कि पूरे जमुई जिले की यही हालत है। अधिकांश पंचायतें नरेगा के तहत तालाब, आहर और बांध जैसे निर्माण कार्यों पर ही फोकस कर रही हैं।

यह एक महत्वपूर्ण सवाल उठाता है—

  • क्या ये योजनाएं इसलिए प्राथमिकता में हैं क्योंकि वे आसानी से दिखने वाली परियोजनाएं हैं?
  • क्या इनसे तत्काल रोजगार उपलब्ध होता है, इसलिए इन्हें प्राथमिकता दी जा रही है?
  • क्या सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरतों को नजरअंदाज किया जा रहा है?

यह स्पष्ट है कि पंचायतें जिस तरह से पैसा खर्च कर रही हैं, उसमें संतुलन की कमी दिखती है।


निष्कर्ष

बलथर पंचायत में वित्तीय वर्ष 2024-2025 के दौरान कुल खर्च ₹12,020,843 (एक करोड़ बीस लाख बीस हजार आठ सौ तैंतालीस रुपये) में से ₹7,166,490 (सत्तर लाख सोलह हजार चार सौ नब्बे रुपये) सिर्फ तालाब, आहर और पोखर निर्माण पर खर्च किए गए।

यह प्रशासन की जल संरक्षण और ग्रामीण रोजगार को प्राथमिकता देने की नीति को दर्शाता है। हालांकि, यह भी स्पष्ट है कि जनता के मन में संदेह और सवाल हैं। पंचायतों को चाहिए कि वे अन्य जरूरी विकास कार्यों पर भी ध्यान दें, ताकि पूरे जिले का संतुलित और समग्र विकास सुनिश्चित किया जा सके।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह डेटा आधिकारिक सरकारी वेबसाइटों से एकत्र किया गया है और केवल सूचना के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। यदि किसी भी प्रकार की त्रुटि, बदलाव या अशुद्धि पाई जाती है, तो मैं इसके लिए उत्तरदायी नहीं हूँ। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले संबंधित सरकारी वेबसाइट से जानकारी को स्वयं सत्यापित करें


Monday, March 24, 2025

जमुई सदर अस्पताल में MLC प्रक्रिया का अनुपालन न होना: एक गंभीर प्रशासनिक लापरवाही


"पोस्टमार्टम तो हो रहा है, पर MLC क्यों नहीं दर्ज किया जा रहा?"

जमुई जिले के सदर अस्पताल में एक चिंताजनक स्थिति उत्पन्न हो गई है जहाँ मृतकों का पोस्टमार्टम तो किया जा रहा है, लेकिन मेडिको-लीगल केस (MLC) दर्ज नहीं किया जा रहा। यह स्थिति न केवल कानूनी प्रक्रियाओं का उल्लंघन है, बल्कि मृतक के परिवारजनों के साथ होने वाले न्याय में भी बाधक है।

मौजूदा व्यवस्था में खामियाँ

अपूर्ण दस्तावेजीकरण: पोस्टमार्टम रिपोर्ट जारी की जाती है, लेकिन उसमें MLC संख्या का उल्लेख नहीं होता

पुलिस और अस्पताल के बीच समन्वय का अभाव: हालांकि पुलिस मामला दर्ज कर लेती है, पर अस्पताल द्वारा MLC दर्ज न करने से कानूनी प्रक्रिया अधूरी रह जाती है

परिवारों को भ्रम की स्थिति: परिजनों को लगता है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद सब कुछ पूरा हो गया, जबकि MLC के बिना मामला कानूनी तौर पर अपूर्ण माना जाता है

इसके गंभीर परिणाम

कानूनी जटिलताएँ: बीमा दावे, संपत्ति हस्तांतरण और कानूनी निपटान में देरी।

अपराधियों को छूट का जोखिम: यदि मृत्यु किसी आपराधिक घटना का परिणाम है, तो MLC न होने से जाँच प्रभावित होती है

पारदर्शिता का अभाव: अस्पताल और पुलिस प्रशासन के बीच समन्वयहीनता से पारदर्शिता खत्म होती है

क्या कहता है कानून?

भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 174: किसी भी अप्राकृतिक मृत्यु की सूचना पुलिस को देना और MLC दर्ज करना अनिवार्य है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश (2016): "हर अस्पताल को यह सुनिश्चित करना होगा कि अप्राकृतिक मौतों को MLC के तहत दर्ज किया जाए।"

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के दिशा-निर्देश: "MLC के बिना पोस्टमार्टम रिपोर्ट को अधूरा माना जाएगा।"

नागरिक क्या कर सकते हैं?

पोस्टमार्टम रिपोर्ट की प्रति लें और MLC नंबर की पुष्टि करें।

यदि MLC नहीं दिया गया है, तो अस्पताल के मेडिकल रिकॉर्ड विभाग से लिखित में अनुरोध करें।

शिकायत दर्ज करें:

जिला स्वास्थ्य अधिकारी (CMO) को लिखित शिकायत भेजें।

स्वास्थ्य विभाग की हेल्पलाइन (104) पर संपर्क करें।

RTI दायर करें:

"पिछले 6 महीनों में कितने MLC केस दर्ज किए गए?"

"कितने पोस्टमार्टम केस में MLC नहीं दर्ज हुआ?"

प्रमोद कुमार पांडेय ने संबंधित विभागों को पत्र लिखा

RTI कार्यकर्ता प्रमोद कुमार पांडेय ने इस गंभीर प्रशासनिक लापरवाही को लेकर स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन, और पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखा है। उन्होंने पत्र में यह स्पष्ट किया कि यदि अस्पताल में MLC रिपोर्ट दर्ज नहीं की जा रही है, तो यह न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि परिवारों के न्याय के अधिकार का हनन भी है।

पत्र में यह माँग की गई है कि:

  • जमुई सदर अस्पताल में MLC प्रक्रिया की जाँच की जाए।
  • पिछले 6 महीनों के सभी अप्राकृतिक मृत्यु के मामलों में MLC दर्ज करने की स्थिति की समीक्षा की जाए।
  • भविष्य में MLC दर्ज न करने वाले अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई की जाए।

यदि इस विषय पर उचित कार्रवाई नहीं की जाती है, तो यह मामला मानवाधिकार आयोग और उच्च न्यायालय तक ले जाया जाएगा

निष्कर्ष

जमुई सदर अस्पताल को तत्काल MLC प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करना चाहिए। यदि यह लापरवाही जारी रहती है, तो उच्च स्तर पर हस्तक्षेप की आवश्यकता होगी ताकि कानूनी प्रक्रियाओं का सही ढंग से पालन हो सके।

#MLC_अनुपालन #जमुई_सदर_अस्पताल #कानूनी_प्रक्रिया #स्वास्थ्य_अधिकार

क्या आपके साथ भी ऐसा हुआ है? अपने अनुभव साझा करें!


अस्वीकरण (Disclaimer)

यह ब्लॉग केवल जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें प्रस्तुत सभी तथ्य, घटनाएँ और विश्लेषण उपलब्ध स्रोतों, व्यक्तिगत अनुभवों, और जनहित में प्राप्त सूचनाओं पर आधारित हैं।

  • इस ब्लॉग का उद्देश्य किसी संस्था, व्यक्ति, सरकारी विभाग, या प्रशासन की छवि को धूमिल करना नहीं है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और कानूनी प्रक्रियाओं के उचित अनुपालन की माँग करना है।
  • यदि किसी तथ्य में सुधार की आवश्यकता है या कोई अतिरिक्त प्रमाण उपलब्ध है, तो संबंधित अधिकारी या व्यक्ति वास्तविक दस्तावेज़ प्रस्तुत कर सकते हैं
  • यह ब्लॉग किसी भी कानूनी या प्रशासनिक प्रक्रिया का आधिकारिक दस्तावेज़ नहीं है। पाठकों को किसी भी कार्रवाई से पहले विधिक विशेषज्ञों या संबंधित सरकारी विभागों से परामर्श करने की सलाह दी जाती है

ब्लॉगर: प्रमोद कुमार पांडेय 
#सूचना_का_अधिकार #MLC_अनुपालन #न्याय_की_मांग

Sunday, March 23, 2025

काला पंचायत लक्ष्मीपुर,गाँव के छोटे बच्चों के लिए खतरनाक दवा – SD-Cold-DS Suspension


नमस्ते दोस्तों,  
मैं प्रमोद पांडेय, बिहार के जमुई जिले के लक्ष्मीपुर प्रखंड की काला पंचायत से हूँ। आज मैं आपके साथ एक गंभीर मुद्दे को साझा करना चाहता हूँ, जो हमारे गाँव के बच्चों की सेहत से जुड़ा हुआ है। यह मुद्दा हमारे यहाँ के स्थानीय डॉक्टरों द्वारा दी जा रही एक दवा, SD-Cold-DS Suspension, से संबंधित है। यह दवा खासकर छोटे बच्चों के लिए खतरनाक साबित हो रही है, और इसके बारे में जागरूकता फैलाना बेहद जरूरी है।  
हमारे गाँव की स्थिति  
काला पंचायत एक छोटा सा ग्रामीण इलाका है, जहाँ की आबादी लगभग 1,500-5,000 के आसपास है। यहाँ के लोग मुख्य रूप से खेती पर निर्भर हैं। स्वास्थ्य सुविधाएँ यहाँ बहुत सीमित हैं। नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र लक्ष्मीपुर में है, जो यहाँ से 10 किलोमीटर दूर है। ऐसे में, गाँव वाले छोटी-मोटी बीमारियों के लिए स्थानीय डॉक्टरों पर ही निर्भर रहते हैं।  

लेकिन हाल ही में एक चौंकाने वाली बात सामने आई है। हमारे गाँव के कुछ डॉक्टर छोटे बच्चों को SD-Cold-DS Suspension नामक दवा दे रहे हैं, जो 1.5 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि ये डॉक्टर न तो आधिकारिक पर्ची (प्रिस्क्रिप्शन) दे रहे हैं और न ही दवा के साइड इफेक्ट्स के बारे में कोई जानकारी दे रहे हैं। वे केवल सादे सफेद कागज पर दवा का नाम लिखकर दे देते हैं, जो पूरी तरह से अनौपचारिक और गलत तरीका है।  

 SD-Cold-DS Suspension क्या है?  
यह एक सिरप है, जिसमें निम्नलिखित तत्व होते हैं:  
1. पैरासिटामोल (125 मिलीग्राम): बुखार और दर्द के लिए।  
2. क्लोरफेनिरामाइन मेलिएट (1 मिलीग्राम): एलर्जी और सर्दी के लिए।  
3. फेनिलएफ्रिन एचसीएल (2.5 मिलीग्राम): नाक की जकड़न हटाने के लिए।  
4. सोडियम साइट्रेट और मेन्थॉल: गले को राहत देने के लिए।  

यह दवा सर्दी, बुखार, और नाक बहने जैसी समस्याओं के लिए दी जाती है। लेकिन इसमें मौजूद कुछ तत्व छोटे बच्चों के लिए खतरनाक हो सकते हैं।  

1.5 साल के बच्चे के लिए यह दवा क्यों खतरनाक है?  
1. क्लोरफेनिरामाइन मेलिएट: यह एंटीहिस्टामाइन 2 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं है। इससे नींद, चिड़चिड़ापन, और साँस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।  
2. फेनिलएफ्रिन एचसीएल: यह डीकंजेस्टेंट 4 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए अनुशंसित नहीं है। इससे दिल की धड़कन तेज होना, बेचैनी, और नींद न आने जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।  
3. पैरासिटामोल: यह तत्व अकेले तो सुरक्षित है, लेकिन अन्य खतरनाक तत्वों के साथ मिलकर यह जोखिम भरा हो जाता है।  

इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (IAP) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, 2 साल से कम उम्र के बच्चों को ऐसी कॉम्बिनेशन दवाएँ नहीं देनी चाहिए।  

हमारे गाँव में स्थिति  
काला पंचायत में साक्षरता दर केवल 51.20% है, जिसके कारण लोगों को दवाओं के साइड इफेक्ट्स की ज्यादा जानकारी नहीं है। यहाँ के ज्यादातर लोग स्थानीय डॉक्टरों पर भरोसा करते हैं, जो अक्सर ऐसी दवाएँ दे देते हैं जो बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं होतीं। मेरे पड़ोस में एक 1.5 साल के बच्चे को यह दवा दी गई थी, जिसके बाद उसे नींद न आने और चिड़चिड़ापन जैसी समस्याएँ हुईं। जब हमने एक बड़े डॉक्टर से संपर्क किया, तो उन्होंने तुरंत इस दवा को बंद करने की सलाह दी।  

सबसे दुखद बात यह है कि यहाँ के डॉक्टर आधिकारिक पर्ची भी नहीं दे रहे हैं। वे केवल सादे सफेद कागज पर दवा का नाम लिखकर दे देते हैं, जो पूरी तरह से अनौपचारिक और गलत तरीका है। वे बिना यह समझाए कि इसे कैसे लेना है, कितनी मात्रा देनी है, या इसके साइड इफेक्ट्स क्या हो सकते हैं, दवा दे देते हैं।  

मेरी अपील: इस दवा का उपयोग बंद करें  
मैं अपने गाँव वालों से अपील करता हूँ कि कृपया SD-Cold-DS Suspension का उपयोग 1.5 साल या उससे छोटे बच्चों के लिए न करें। अगर आपके बच्चे को बुखार है, तो केवल पैरासिटामोल सिरप (जैसे Crocin 120 mg/5 ml) का उपयोग करें, और वह भी सही डोज़ में। सर्दी या नाक बहने के लिए नमक के पानी की बूँदें (सलाइन ड्रॉप्स) का उपयोग करें। अगर लक्षण ठीक न हों, तो तुरंत किसी अच्छे बच्चों के डॉक्टर से संपर्क करें।  

साथ ही, मैं आपसे यह भी कहना चाहता हूँ कि अपने स्थानीय डॉक्टर से सवाल करें। उनसे आधिकारिक पर्ची माँगें और दवा के बारे में पूरी जानकारी लें। सादे सफेद कागज पर लिखी दवा को स्वीकार न करें।  

 सरकार से अनुरोध  
मैं बिहार सरकार और भारत सरकार से अनुरोध करता हूँ कि:  
1. ऐसी कॉम्बिनेशन दवाओं पर सख्त नियम बनाएँ।  
2. ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाएँ।  
3. स्थानीय डॉक्टरों को प्रशिक्षण दें।  
4. गाँवों में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करें।  

निष्कर्ष  
हमारे गाँव में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी एक बड़ी समस्या है। लेकिन हमें अपने बच्चों की सेहत के लिए जागरूक होना होगा। SD-Cold-DS Suspension जैसी दवाएँ हमारे छोटे बच्चों के लिए खतरा बन सकती हैं। साथ ही, डॉक्टरों का बिना पर्ची के दवा देना और जानकारी छुपाना भी एक गंभीर मुद्दा है।  

अगर आपके पास इस बारे में कोई अनुभव या सुझाव है, तो कृपया कमेंट में बताएँ। साथ ही, इस ब्लॉग को अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ शेयर करें, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग जागरूक हो सकें।  

धन्यवाद!  
प्रमोद पांडेय  
काला पंचायत, लक्ष्मीपुर प्रखंड, जमुई जिला, बिहार

डिस्क्लेमर
 इस ब्लॉग में व्यक्त विचार, अनुभव और जानकारी लेखक के निजी अनुसंधान और अनुभवों पर आधारित हैं। यह ब्लॉग केवल जागरूकता और सूचना के उद्देश्य से लिखा गया है और इसका मकसद किसी भी तरह की चिकित्सीय सलाह देना नहीं है।
इस ब्लॉग में दी गई जानकारी, विशेष रूप से SD-Cold-DS Suspension दवा और इसके प्रभावों के बारे में, सामान्य जागरूकता के लिए है। यह किसी भी तरह से पेशेवर चिकित्सीय सलाह, निदान, या उपचार का विकल्प नहीं है। यदि आपके बच्चे या परिवार के किसी सदस्य को कोई स्वास्थ्य समस्या है, तो कृपया किसी योग्य चिकित्सक या बाल रोग विशेषज्ञ (पेडियाट्रिशियन) से परामर्श करें। इस ब्लॉग में दी गई जानकारी के आधार पर कोई भी दवा शुरू करने, बदलने या बंद करने से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।

कानूनी नोटिस:
इस ब्लॉग का उद्देश्य किसी व्यक्ति, समूह, या संस्था को बदनाम करना नहीं है। यदि किसी को लगता है कि इस ब्लॉग में दी गई जानकारी से उनकी भावनाओं को ठेस पहुँची है, तो वे लेखक से संपर्क कर सकते हैं।इस ब्लॉग को पढ़ने और साझा करने के लिए धन्यवाद। कृपया अपने और अपने परिवार की सेहत का ध्यान रखें और हमेशा योग्य चिकित्सक की सलाह लें।