मनरेगा योजना गाँवों में रोजगार उपलब्ध कराने और ग्रामीण विकास को गति देने के लिए बनाई गई थी, लेकिन खिलार पंचायत लक्ष्मीपुर में इसकी सच्चाई कुछ और ही है। यहाँ फर्जी उपस्थिति दर्ज कर मजदूरी निकाली जा रही है, जबकि असल में काम करने वाले मजदूरों को उनका हक नहीं मिल रहा।
दैनिक जागरण के अनुसार, रोजगार सेवक अजय कुमार दास ने डीईओ को आवेदन देकर शिवसोना के प्रभारी एचएम कपूरी कुमार यादव पर सरकारी कार्य में बाधा डालने, गाली-गलौज करने और जातिसूचक शब्दों के प्रयोग का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि एचएम की पत्नी क्रांति देवी खिलार पंचायत की वार्ड सदस्य हैं, लेकिन पंचायत के कार्यों में उनकी जगह एचएम ही हस्तक्षेप करते हैं।
शिकायत के अनुसार, एचएम पंचायत में चल रही मनरेगा योजनाओं में अनावश्यक दखल देते हैं, पंचायत के मुखिया और रोजगार सेवक को काम करने से रोकते हैं और अपने सगे-संबंधियों को लाभ पहुँचाने के लिए दबाव बनाते हैं। इतना ही नहीं, वे ग्राम सभा और आम सभा की बैठकों में पत्नी की जगह खुद भाग लेते हैं और योजनाओं के चयन में हस्तक्षेप करते हैं।
रोजगार सेवक द्वारा की गई यह शिकायत अपने आप में कई सवाल खड़े करती है। किया पंचायत में फर्जी हाजिरी लग रही हे ?, तो रोजगार सेवक ने पहले कभी इसकी शिकायत क्यों नहीं की? जब एनएमएमएस (National Mobile Monitoring System) लागू हो गया था, तब भी फर्जी हाजिरी कैसे जारी रही? क्या रोजगार सेवक ने पहले कोई कार्रवाई की?
अगर पंचायत में फर्जी मजदूरों के नाम पर पैसा निकाला जा रहा था, तो रोजगार सेवक अब तक चुप क्यों है? क्या वह खुद इस भ्रष्टाचार का हिस्सा नहीं हैं? क्या यह शिकायत असल मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश है?
यह समस्या सिर्फ खिलार पंचायत लक्ष्मीपुर तालुका तक सीमित नहीं है। जमुई जिले के अन्य पंचायतों में भी मनरेगा में फर्जी हाजिरी और बिना काम किए पैसे निकालने की खबरें आम हो गई हैं। कई योजनाओं में सिर्फ बोर्ड लगे हुए हैं, लेकिन कोई वास्तविक कार्य नहीं हुआ। प्रभावशाली लोग अपने परिचितों को फायदा पहुँचाने के लिए योजनाओं का दुरुपयोग कर रहे हैं।
दैनिक जागरण ने जिस तरह रोजगार सेवक की शिकायत को प्रमुखता से प्रकाशित किया, क्या वह एनएमएमएस के माध्यम से हो रही फर्जी हाजिरी की भी रिपोर्टिंग करेगा? क्या एनएमएमएस सिर्फ कागज़ों में पारदर्शिता दिखाने का एक औपचारिक प्रयास बनकर रह गया है?
अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन, मीडिया और रोजगार सेवक इस गंभीर मुद्दे को किस तरह से उठाते हैं। क्या फर्जी हाजिरी की समस्या का समाधान निकलेगा, या फिर यह भी सरकारी दफ्तरों में धूल खाती एक और फाइल बनकर रह जाएगी?
मैं इस ब्लॉग में फर्जी उपस्थिति से जुड़े कुछ फोटो भी जोड़ रहा हूँ, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि मनरेगा योजना का किस तरह दुरुपयोग किया जा रहा है। (यहाँ पर तस्वीरें जोड़ें
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