Monday, February 3, 2025

लक्ष्मीपुर तालुका में मनरेगा घोटाला: फर्जी हाजिरी का खेल जारी!


लक्ष्मीपुर तालुका, जमुई जिले में मनरेगा में फर्जी हाजिरी का खेल लगातार जारी है। हर साल सरकार करोड़ों रुपये खर्च करती है ताकि गांवों के गरीब मजदूरों को रोजगार मिले, लेकिन हकीकत यह है कि इस योजना का फायदा कुछ खास लोगों को ही मिल रहा है। मैंने खुद मनरेगा की आधिकारिक NMMS वेबसाइट से कुछ तस्वीरें डाउनलोड की हैं, जिनमें मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की गई है। हालांकि, मैंने मजदूरों की पहचान छुपाई है, क्योंकि यह उनकी निजी सुरक्षा का मामला है। फिर भी, अगर कोई चाहे तो खुद NREGA की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर इन फर्जी हाजिरियों की सच्चाई देख सकता है।

मनरेगा के नियम के अनुसार, मजदूरों की उपस्थिति अब मोबाइल ऐप के जरिए सुबह और शाम दोनों समय ली जाती है। इसके लिए लाइव लोकेशन और फोटो अनिवार्य है, ताकि कोई भी गड़बड़ी न हो। लेकिन लक्ष्मीपुर तालुका में इस नियम को केवल कागजों में लागू किया गया है। असल में, मजदूरों की तस्वीरें प्रिंट करके या किसी और तरीके से अपलोड की जा रही हैं।

यह कोई पहली बार नहीं हो रहा। वर्षों से यह गड़बड़ी चल रही है, लेकिन मनरेगा के अधिकारी इसे गंभीरता से नहीं लेते। शिकायतें दर्ज होती हैं, जांच के आदेश भी आते हैं, लेकिन कुछ दिनों बाद सब कुछ फिर से पहले जैसा हो जाता है। फर्जी हाजिरी का यह सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा।

लक्ष्मीपुर तालुका में मनरेगा का यह घोटाला अब बड़ा रूप ले चुका है। लाखों-करोड़ों रुपये ऐसे मजदूरों के नाम पर निकाल लिए जाते हैं, जो असल में काम पर गए ही नहीं। इस घोटाले में सिर्फ स्थानीय स्तर के अधिकारी ही नहीं, बल्कि बड़े स्तर पर मिलीभगत नजर आ रही है। 

यह जरूरी है कि प्रशासन अब इस मामले को गंभीरता से ले। मैं खुद जनता से अपील करता हूं कि वे NREGA की वेबसाइट पर जाकर इन तस्वीरों को जांचें और अपनी राय दें। यह केवल लक्ष्मीपुर तालुका की समस्या नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम की खामियों को उजागर करता है। अगर अब भी इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो मनरेगा का असली उद्देश्य कभी पूरा नहीं हो पाएगा और जरूरतमंद मजदूरों को उनका हक नहीं मिलेगा।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह लेख केवल सूचना और जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें प्रस्तुत तस्वीरें और जानकारी मनरेगा की आधिकारिक NMMS वेबसाइट से ली गई हैं, लेकिन मजदूरों की गोपनीयता को बनाए रखने के लिए उनके चेहरे छुपाए गए हैं। लेख में उठाए गए मुद्दे स्थानीय स्तर पर सामने आई गड़बड़ियों और जन शिकायतों पर आधारित हैं।

यदि किसी भी व्यक्ति, संस्था या अधिकारी को इसमें शामिल जानकारी पर आपत्ति हो, तो वे संबंधित प्राधिकरण से सत्यापन कर सकते हैं। हमारा उद्देश्य केवल पारदर्शिता और सुधार को बढ़ावा देना है, न कि किसी व्यक्ति या संगठन को बदनाम करना।

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