प्रिय ब्लॉग पाठकों,
कुछ दिन पहले मैंने मनरेगा योजना पर एक ब्लॉग लिखा था। जब यह ब्लॉग सार्वजनिक हुआ, तो मुझे कुछ लोगों से अप्रत्यक्ष धमकियां मिलने लगीं। संदेशों के जरिए मुझे यह एहसास दिलाया गया कि सच लिखने की कीमत चुकानी पड़ सकती है। लेकिन मैं स्पष्ट कर दूं कि मेरा ब्लॉग पूरी तरह सत्य और वास्तविक तथ्यों पर आधारित है।
"पहले वे आपको अनदेखा करेंगे, फिर आप पर हंसेंगे, फिर आपसे लड़ेंगे, और अंत में आप जीत जाएंगे।"
— महात्मा गांधी
पिछले साल भी जब मैंने इसी विषय पर एक ब्लॉग लिखा था, तब कुछ लोग मेरे घर के पास आए और गाली-गलौज करने लगे। स्थिति इतनी बिगड़ गई थी कि मैंने पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी और अपनी शिकायत में 10 से 15 लोगों के नाम जोड़े थे। हालांकि, बाद में आपसी समझौते के तहत मामला सुलझ गया और मैंने शिकायत वापस ले ली।
लेकिन इस बार फिर, जब मैंने अपना ब्लॉग पोस्ट किया, तो वही विवाद दोबारा शुरू हो गया। अब मुझे फिर से धमकियां मिल रही हैं। लेकिन क्या सच बोलना अपराध है? महात्मा गांधी ने कहा था:
"आप मुझे जंजीरों में जकड़ सकते हैं, मुझे यातना दे सकते हैं, यहां तक कि मेरा कत्ल भी कर सकते हैं, लेकिन आप मेरे विचारों को कभी कैद नहीं कर सकते।"
मैं बस यही कहना चाहता हूं कि मेरा उद्देश्य किसी को नीचा दिखाना नहीं, बल्कि सच्चाई उजागर करना है। हम एक लोकतांत्रिक देश में रहते हैं, जहां हर नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है। अगर किसी को मेरी बातों से असहमति है, तो वह तथ्यों के आधार पर चर्चा कर सकता है, लेकिन धमकियों से मैं पीछे नहीं हटने वाला।
मैं अपने पाठकों से पूछना चाहता हूं—क्या यह सही है कि सच बोलने वालों को इस तरह डराया-धमकाया जाए? क्या हमें अपनी आवाज़ को दबा देना चाहिए, या सच के लिए डटे रहना चाहिए? आपकी राय कमेंट में जरूर साझा करें।
"सत्य कभी नहीं हारता, लेकिन उसे सहनशीलता की कसौटी पर खरा उतरना पड़ता है।"
— महात्मा गांधी
No comments:
Post a Comment