लक्ष्मीपुर तालुका के काला पंचायत में PACS केंद्र किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर रहा है। इस पंचायत के पंच और समर्पित किसान दिवाकर पांडेय ने जब अपनी फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर बेचने की कोशिश की, तो PACS केंद्र ने यह कहते हुए साफ मना कर दिया कि उनके पास पर्याप्त पैसा (सीसी) नहीं हैं। यह केवल एक किसान का नहीं, बल्कि पूरे पंचायत का अपमान है।
दिवाकर पांडेय, जो हमेशा पंचायत के लोगों के विवादों को सुलझाने में सबसे आगे रहते हैं, आज खुद न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं। खेती के लिए उन्होंने कर्ज लिया था, लेकिन PACS केंद्र की इस असफलता ने उन्हें आर्थिक संकट में डाल दिया है। उनका कर्ज बढ़ रहा है, और वह ब्याज चुकाने में असमर्थ हो रहे हैं।
लक्ष्मीपुर तालुका के अधिकारियों ने भी उनकी मदद करने की बजाय उन्हें निराश किया। जमुई के डीसीओ और लक्ष्मीपुर के बीसीओ से फोन पर बातचीत के दौरान दिवाकर पांडेय को यह कहकर झटका दिया गया कि वह अपनी फसल लक्ष्मीपुर व्यापार मंडल में बेचें। लक्ष्मीपुर व्यापार मंडल, जो काला पंचायत से लगभग 15 किलोमीटर दूर है, वहां तक अपनी फसल ले जाने का खर्च दिवाकर पांडेय जैसे किसान के लिए असंभव है।
यह स्थिति लक्ष्मीपुर तालुका में किसानों के प्रति सरकारी उदासीनता को उजागर करती है। काला पंचायत के किसान, जिनका जीवन फसल और मेहनत पर निर्भर है, आज अपने अधिकारों से वंचित हो रहे हैं। प्रशासन और PACS केंद्र की नाकामी ने किसानों के आत्मसम्मान को चोट पहुंचाई है।
दिवाकर पांडेय कहते हैं, "यह केवल मेरी फसल का सवाल नहीं है। यह हमारी मेहनत और आत्मसम्मान की लड़ाई है। अगर मैं झुक गया, तो पूरे काला पंचायत के किसान झुक जाएंगे।" लक्ष्मीपुर तालुका के काला पंचायत के किसानों के लिए यह केवल एक घटना नहीं, बल्कि उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का दर्द है।
लक्ष्मीपुर तालुका में यह समस्या अकेली नहीं है। PACS केंद्र और प्रशासन की उदासीनता ने यह साबित कर दिया है कि किसानों की समस्याएं उनकी प्राथमिकता नहीं हैं। काला पंचायत के किसानों का संघर्ष अब एक बड़ी लड़ाई बन चुका है। सवाल यह है कि सरकार और प्रशासन कब इस अन्याय के खिलाफ कदम उठाएंगे?
अस्वीकरण: इस ब्लॉग में उल्लिखित सभी जानकारी संबंधित स्रोतों से प्राप्त की गई है। लेखक ने इस ब्लॉग में दिवाकर पांडेय की तस्वीर का उपयोग उनके द्वारा दी गई स्वीकृति के साथ किया है। सभी चित्र और जानकारी केवल सूचना उद्देश्यों के लिए हैं और इसका उद्देश्य किसी भी व्यक्ति या संस्था को नुकसान पहुँचाना नहीं है। सभी विचार और विचारधाराएँ लेखक के निजी दृष्टिकोण हैं।
No comments:
Post a Comment