आज काला पंचायत लक्ष्मीपुर जमुई, में आयोजित सहभागी ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) की आम सभा और एक मदारी के आयोजन के बीच की तुलना ने एक गहरी विडंबना को उजागर किया। GPDP की यह आम सभा, जो पिछली सप्ताह निर्धारित थी, पंचायत के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण थी। लेकिन यह योजना अपनी शुरुआत में ही विफल होती नजर आई। दूसरी ओर, मदारी ने मात्र 30 मिनट में डमरू बजाकर 100 से अधिक बच्चों और युवाओं को आकर्षित कर लिया।
मदारी के आयोजन में न तो कोई औपचारिक आमंत्रण था और न ही किसी बड़े प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पड़ी। केवल अपनी कला के माध्यम से उसने गांव के लोगों का ध्यान खींचा और कुछ ही समय में एक बड़ी भीड़ जुटा ली। इसके विपरीत, GPDP योजना की सभा, जिसे एक सप्ताह पहले ही सूचित किया गया था, में पंचायत के अधिकांश प्रतिनिधि और ग्रामीणों की भागीदारी नहीं हो सकी। यह दर्शाता है कि पंचायत का सूचना तंत्र और जागरूकता अभियान कितना कमजोर है।
GPDP की इस बैठक का उद्देश्य गांव के विकास की प्राथमिकताओं को समझकर उन्हें योजनाबद्ध तरीके से क्रियान्वित करना था। लेकिन इसमें पंचायत के कई महत्वपूर्ण प्रतिनिधि, जैसे पंचायत सचिव, रोजगार सेवक, और अन्य विभागीय अधिकारी अनुपस्थित रहे। केवल दो फ्रंटलाइन वर्कर उपस्थित थे। ग्रामीणों में भी सभा के प्रति कोई विशेष उत्साह नहीं दिखा।
दूसरी ओर, मदारी ने बिना किसी औपचारिकता के लोगों को अपनी कला से प्रभावित किया। उसकी कला ने यह साबित कर दिया कि यदि कोई संदेश या आयोजन लोगों तक सही तरीके से पहुंचाया जाए, तो लोग स्वतः जुड़ते हैं। यह GPDP योजना के लिए एक बड़ा सबक है।
GPDP की इस असफलता के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
1. सूचना का अभाव:
सभा की जानकारी ग्रामीणों तक सही तरीके से नहीं पहुंचाई गई।
2. प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति:
पंचायत के कई प्रमुख प्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी सभा में शामिल नहीं हुए।
3. जागरूकता की कमी:
ग्रामीणों को इस योजना के महत्व के बारे में समझाने का प्रयास नहीं किया गया।
4. लापरवाही का माहौल:
योजना को लेकर पंचायत प्रतिनिधियों की लापरवाही साफ झलकती है।
यह घटना बताती है कि GPDP जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं की सफलता तभी संभव है जब पंचायत, विभागीय अधिकारी और ग्रामीण मिलकर काम करें। मदारी के आयोजन से यह सबक लिया जा सकता है कि सही संचार और प्रभावी जागरूकता किसी भी आयोजन को सफल बना सकते हैं। पंचायत को चाहिए कि वह सूचना तंत्र को मजबूत करे, जागरूकता बढ़ाए और जिम्मेदार लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करे।
यदि पंचायत प्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों को नहीं समझेंगे, तो विकास योजनाएं केवल कागजों पर ही सीमित रह जाएंगी। GPDP योजना को सफल बनाने के लिए यह आवश्यक है कि पंचायत और ग्रामीण दोनों सक्रिय रूप से भाग लें और मिलकर अपने गांव के विकास की दिशा में ठोस कदम उठाएं।
अस्वीकरण:
इस लेख में दी गई जानकारी और विचार केवल लेखक के व्यक्तिगत दृष्टिकोण और अनुभवों पर आधारित हैं। लेख में उल्लिखित घटनाएँ और तथ्यों को पूरी तरह से सत्यापित नहीं किया गया है, और इन्हें केवल संदर्भ और चर्चा के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। पंचायत और संबंधित विभागों द्वारा किए गए कार्यों और निर्णयों के बारे में कोई भी बयान या विचार केवल सामान्य जानकारी के रूप में प्रस्तुत किए गए हैं और किसी विशेष व्यक्ति या संस्था को निशाना बनाने का उद्देश्य नहीं है। लेख में व्यक्त विचारों और टिप्पणियों के लिए लेखक व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार हैं, और इनसे संबंधित कोई भी कानूनी या अन्य दावों के लिए लेखक ही उत्तरदायी होंगे।
साथ ही, इस लेख में कुछ चित्रों का उपयोग किया गया है जो मदारी कार्यक्रम में शामिल व्यक्तियों की सहभागिता को दर्शाते हैं। इन चित्रों का उद्देश्य केवल घटनाओं को दृश्य रूप में प्रस्तुत करना है और इनसे संबंधित किसी भी व्यक्ति या घटना का प्रचार-प्रसार करना नहीं है।
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