Tuesday, January 7, 2025

लक्ष्मीपुर मनरेगा के खिलाफ विकास कुमार पांडेय की लड़ाई


विकास कुमार पांडेय, जो कि काला पंचायत, लक्ष्मीपुर तालुका, जमुई के निवासी हैं, एक ऐसे व्यक्ति हैं जिनका जीवन संघर्ष और समर्पण की मिसाल पेश करता है। 35 वर्ष की आयु में, वह अपने छह भाइयों के साथ राम-लक्ष्मण की तरह बंधे हुए हैं, और हमेशा अपने समाज के लिए समर्पित रहते हैं।

कभी वह एक आशीर्वाद के रूप में दिखाई देते हैं, जो हमेशा दूसरों के दुख में सहारा बनता है, चाहे वह भावनात्मक संकट हो या शारीरिक कष्ट। लेकिन एक दिन, एक दुर्घटना ने उनके जीवन को मानो थाम लिया। सड़क पर बुरी तरह से घायल होने के बाद वह कोमा में चले गए, और दो हफ्ते तक बिस्तर पर पड़े रहे। लेकिन उनके साथ गाँववाले और उनका परिवार निरंतर प्रार्थना करते रहे। उनकी चाहत और विश्वास से ऐसा लगा जैसे भगवान ने उन्हें दूसरी जिंदगी देने का वचन लिया। और फिर एक दिन, जब वह कोमा से बाहर आए, तो यह मानो एक नए जीवन की शुरुआत थी।

"यह जीवन हमें हर मोड़ पर सिखाता है," उन्होंने कहा, "कि अगर हमारे इरादे सच्चे हों, तो कोई भी असंभव नहीं होता।"

विकास का दिल हमेशा अपने पंचायत की तकलीफों के लिए धड़कता है। उनका विश्वास था कि एक बदलाव की आवश्यकता है। उन्होंने देखा कि मनरेगा योजना में भ्रष्टाचार फैला हुआ है, पंचायत के प्रतिनिधि विकास कार्यों में रुचि नहीं ले रहे, और सरकारी धन का गलत उपयोग हो रहा है। तालाबों का निर्माण तो दिखाया गया, लेकिन वे अधूरे थे, किसान उनकी जरूरतों के लिए परेशान थे।

विकास ने इस मुद्दे को उठाने का निश्चय किया। उन्होंने अपने गाँव के लोगों की शिकायतों को सुना और उन पर कार्यवाही करने के लिए सुबूत इकट्ठे किए। उन्हें याद था कि एक साल पहले कुछ लोगों ने लोकपाल जमुई में शिकायत की थी, लेकिन किसी ने कोई कार्रवाई नहीं की, क्योंकि दोषियों और शिकायतकर्ताओं के बीच सुलह हो गई थी। विकास ने सोचा, "अब समय आ गया है कुछ करने का।" वह पटना में लोकायुक्त के पास इस भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने के लिए तैयार है। उनका मानना हे कि प्रशासन को जवाबदेह ठहराना जरूरी है, ताकि सरकारी योजनाएं सही तरीके से किसानों तक पहुंच सकें।

विकास ने कभी नहीं सोचा हे कि वह अपनी इस संघर्षपूर्ण यात्रा में सिर्फ पंचायत का ही नहीं, बल्कि एक नई उम्मीद की किरण बनेंगे। उनकी वापसी के बाद उन्होंने यह संकल्प लिया: "मैं अब केवल एक जिंदगी नहीं जी रहा, बल्कि हर किसी के लिए जी रहा हूं। अगर मेरे पंचायत की जरूरत होगी, तो मैं एक प्रतिनिधि के रूप में उनकी सेवा करूंगा।"

"जय हिंद, जय जवान, जय किसान," यह उनके शब्द हे, जो उन्होंने अपनी आस्था और संविधान के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कहे।

विकास की कहानी सिर्फ एक संघर्ष की नहीं, बल्कि उम्मीद और विश्वास की भी है। वह समाज के लिए एक जीवित उदाहरण हैं कि जब इरादे मजबूत होते हैं, तो कोई भी मुश्किल हमारे रास्ते का रोड़ा नहीं बन सकती। आज उनका गाँव उनकी वापसी पर गर्व महसूस करता है, और हर दिल में उनके लिए एक दुआ है - "आपका जीवन खुशहाल हो, आप हमारे बीच हमेशा रहें।"

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मैं, विकास कुमार पांडेय, यह स्पष्ट करना चाहता हूँ कि मैंने जो फोटो उपयोग की है, वह श्री गिरिराज सिंह, भाजपा के राजनीतिक नेता के साथ ली गई थी। इस फोटो का उपयोग केवल व्यक्तिगत प्रेरणा और सकारात्मक प्रभाव डालने के उद्देश्य से किया गया है। इसका कोई भी राजनीतिक संदर्भ या उद्देश्य नहीं है, और न ही यह किसी पार्टी या व्यक्ति के पक्ष में समर्थन दर्शाता है। यह फोटो केवल प्रेरणा के उद्देश्य से साझा की गई है।



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