Monday, January 27, 2025

क्या फर्जी नामों से हो रही है धान की खरीद?

भारत में धान की खेती लाखों किसानों की आजीविका का प्रमुख स्रोत है। लेकिन बिहार के काला पंचायत पैक्स, जमुई ज़िले से प्राप्त आंकड़े कई प्रश्न खड़े कर रहे हैं। सहकारिता विभाग के पोर्टल से लिए गए डेटा के अनुसार, कुछ किसानों ने अत्यधिक धान बेचने का रिकॉर्ड बनाया है, जो उनके पास उपलब्ध भूमि और सामान्य उत्पादन क्षमता से मेल नहीं खाता। यह स्थिति जांच का विषय बन गई है।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बिनोद प्रसाद ने वर्ष 2024-2025 में 205 क्विंटल धान बेचा, जबकि उनके कुल तीन वर्षों का योग 275 क्विंटल है। गिरा देवी ने तीन वर्षों में कुल 85 क्विंटल धान की बिक्री की है। मनोज कुमार ने 333 क्विंटल धान बेचा, जो इस सूची में सबसे अधिक है। सुरेंद्र सिंह ने 166 क्विंटल धान की बिक्री की। आश्चर्यजनक बात यह है कि कुछ किसान केवल सीमित या बिना जमीन के बावजूद इतनी बड़ी मात्रा में धान बेचने में सक्षम कैसे हैं?

इस डेटा के अनुसार, कई किसानों की बिक्री उनकी कृषि भूमि और सामान्य उत्पादन दर से मेल नहीं खाती। सहकारी पैक्स केंद्र पर किसानों की पहचान और बिक्री प्रक्रिया में गड़बड़ी की संभावनाएं हैं। यह सवाल उठता है कि क्या फर्जी नामों से धान की बिक्री की जा रही है? क्या यह किसान वास्तव में अपनी भूमि की सीमा से परे उत्पादन कर रहे हैं, या उन्होंने नई जमीन खरीदी है?

इन आंकड़ों का विश्लेषण स्पष्ट करता है कि कुछ किसानों के धान की बिक्री के आंकड़े उनकी उत्पादन क्षमता से अधिक हैं। सहकारी पैक्स केंद्र में पारदर्शिता की कमी हो सकती है। असली किसान, जिनका उत्पादन कम है, शायद अपने हिस्से का लाभ नहीं ले पा रहे हैं।

सहकारी पैक्स केंद्र की प्रक्रिया और आंकड़ों की गहराई से जांच होनी चाहिए। किसानों का पंजीकरण और बिक्री प्रक्रिया ऑनलाइन और पारदर्शी होनी चाहिए। गड़बड़ियों में शामिल व्यक्तियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए। असली किसानों को अपने अधिकारों और सरकारी समर्थन योजनाओं के प्रति जागरूक किया जाए।

काला पंचायत में धान की गड़बड़ियां न केवल किसानों के हितों को प्रभावित कर रही हैं, बल्कि पूरे तंत्र की पारदर्शिता पर सवाल उठा रही हैं। यह समय है कि सरकार और सहकारी संस्थाएं इस मुद्दे को प्राथमिकता दें और सुनिश्चित करें कि वास्तविक किसानों को उनका हक मिले।

यह लेख सहकारिता विभाग के पोर्टल पर उपलब्ध डेटा और स्थानीय रिपोर्ट के आधार पर लिखा गया है।

Desclaimer

 यह लेख सहकारिता विभाग के पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों और स्थानीय रिपोर्टों के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें दिए गए सभी तथ्य और जानकारी लेखक के विश्लेषण पर आधारित हैं। यदि किसी भी प्रकार की त्रुटि या असत्यता पाई जाती है, तो उसके लिए संबंधित स्रोत जिम्मेदार होगा। इस लेख का उद्देश्य केवल सूचना प्रदान करना और संबंधित मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाना है। लेखक का किसी भी व्यक्ति, संस्था या संगठन को आहत करने का उद्देश्य नहीं है।



No comments: