Tuesday, January 28, 2025

क्या मीडिया को सही मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए? अस्पताल के बजाय गाँवों की सच्चाई

जमुई सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में हलचल मची थी। डॉक्टर मरीज की जांच कर रहे थे, परिजन बेचैनी से टकटकी लगाए खड़े थे, और इसी बीच कैमरे की चमक ने माहौल को और अजीब बना दिया। मीडिया वाले माइक और फोन लेकर टूट पड़े—“आपको क्या हुआ?”, “डॉक्टरों ने क्या कहा?”, “इलाज में देरी हो रही है क्या?”

बेड पर पड़ा बुजुर्ग दर्द से कराह रहा था। पास खड़ी एक महिला की आँखों में चिंता थी, लेकिन उसके सामने खड़ा रिपोर्टर सवाल पर सवाल किए जा रहा था। इस नजारे को देखकर एक अजीब-सी बेचैनी हुई—क्या अस्पताल का आपातकालीन वार्ड अब खबरों का स्टूडियो बन चुका है? क्या मरीजों की पीड़ा अब सिर्फ टीआरपी का ज़रिया है?

दूसरी तरफ, अगर यही मीडिया वाले थोड़ा और मेहनत करते, तो इन्हें कहीं और भी बड़े मुद्दे मिल सकते थे। अस्पताल में मरीजों की हालत दिखाने से ज्यादा ज़रूरी था उन किसानों की कहानी बताना, जिन्हें उनके ही खेतों में उगाए गए धान को MSP रेट से कम पर बेचने के लिए मजबूर किया जा रहा हैकाला पंचायत पैक्स में हो रही इस धांधली से किसान परेशान हैं, पर प्रशासन की नींद नहीं टूट रही। DM से लेकर DCO तक गुहार लगाई गई, पर जवाब सिर्फ आश्वासन का मिला।

या फिर चलिए ज़रा गाँव की गलियों में चलते हैं, जहाँ मनरेगा योजना के नाम पर फर्जी अटेंडेंस भरी जा रही है। सरकारी रिकॉर्ड्स में खूब सारा तालाब खुद रहे हैं, लेकिन असलियत में वहाँ सिर्फ सूखी ज़मीन है। अधिकारी रिपोर्ट में "सफलता" के झूठे आंकड़े जोड़ रहे हैं, और मज़दूरों की मेहनत की जगह कागजों पर हेरफेर चल रहा है।

लेकिन यह सब दिखाने के लिए मीडिया को मेहनत करनी पड़ती। सवाल उठाने होते, जोखिम लेना पड़ता, सत्ता से टकराने का साहस चाहिए होता। अस्पताल में आकर डॉक्टरों और मरीजों से सवाल करना आसान है, लेकिन गांव में जाकर सच सामने लाना मुश्किल।

मीडिया की असली ज़िम्मेदारी क्या होनी चाहिए—अस्पताल में बेड पर पड़े मरीज का इंटरव्यू लेना या खेतों में खड़े किसान की आवाज़ उठाना? कैमरे की चमक सही जगह पड़ती तो शायद किसी की तकलीफ कम हो सकती थी, लेकिन अफसोस कि खबरें अब सिर्फ आसानी से मिलने वाली ब्रेकिंग न्यूज़ तक ही सीमित रह गई हैं।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह लेख केवल जागरूकता बढ़ाने और विचार-विमर्श के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें व्यक्त की गई राय लेखक की अपनी है और इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति, संस्था, प्रशासन या मीडिया संगठन की छवि को ठेस पहुँचाना नहीं है। लेख में उल्लिखित घटनाएँ और संदर्भ उपलब्ध जानकारी एवं अनुभव पर आधारित हैं।

यदि इसमें किसी तथ्यात्मक त्रुटि या असहमति हो तो कृपया संबंधित प्रमाणों के साथ सूचित करें। लेख का उद्देश्य रचनात्मक आलोचना और सकारात्मक परिवर्तन की ओर ध्यान आकर्षित करना 

है।


Monday, January 27, 2025

क्या फर्जी नामों से हो रही है धान की खरीद?

भारत में धान की खेती लाखों किसानों की आजीविका का प्रमुख स्रोत है। लेकिन बिहार के काला पंचायत पैक्स, जमुई ज़िले से प्राप्त आंकड़े कई प्रश्न खड़े कर रहे हैं। सहकारिता विभाग के पोर्टल से लिए गए डेटा के अनुसार, कुछ किसानों ने अत्यधिक धान बेचने का रिकॉर्ड बनाया है, जो उनके पास उपलब्ध भूमि और सामान्य उत्पादन क्षमता से मेल नहीं खाता। यह स्थिति जांच का विषय बन गई है।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बिनोद प्रसाद ने वर्ष 2024-2025 में 205 क्विंटल धान बेचा, जबकि उनके कुल तीन वर्षों का योग 275 क्विंटल है। गिरा देवी ने तीन वर्षों में कुल 85 क्विंटल धान की बिक्री की है। मनोज कुमार ने 333 क्विंटल धान बेचा, जो इस सूची में सबसे अधिक है। सुरेंद्र सिंह ने 166 क्विंटल धान की बिक्री की। आश्चर्यजनक बात यह है कि कुछ किसान केवल सीमित या बिना जमीन के बावजूद इतनी बड़ी मात्रा में धान बेचने में सक्षम कैसे हैं?

इस डेटा के अनुसार, कई किसानों की बिक्री उनकी कृषि भूमि और सामान्य उत्पादन दर से मेल नहीं खाती। सहकारी पैक्स केंद्र पर किसानों की पहचान और बिक्री प्रक्रिया में गड़बड़ी की संभावनाएं हैं। यह सवाल उठता है कि क्या फर्जी नामों से धान की बिक्री की जा रही है? क्या यह किसान वास्तव में अपनी भूमि की सीमा से परे उत्पादन कर रहे हैं, या उन्होंने नई जमीन खरीदी है?

इन आंकड़ों का विश्लेषण स्पष्ट करता है कि कुछ किसानों के धान की बिक्री के आंकड़े उनकी उत्पादन क्षमता से अधिक हैं। सहकारी पैक्स केंद्र में पारदर्शिता की कमी हो सकती है। असली किसान, जिनका उत्पादन कम है, शायद अपने हिस्से का लाभ नहीं ले पा रहे हैं।

सहकारी पैक्स केंद्र की प्रक्रिया और आंकड़ों की गहराई से जांच होनी चाहिए। किसानों का पंजीकरण और बिक्री प्रक्रिया ऑनलाइन और पारदर्शी होनी चाहिए। गड़बड़ियों में शामिल व्यक्तियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए। असली किसानों को अपने अधिकारों और सरकारी समर्थन योजनाओं के प्रति जागरूक किया जाए।

काला पंचायत में धान की गड़बड़ियां न केवल किसानों के हितों को प्रभावित कर रही हैं, बल्कि पूरे तंत्र की पारदर्शिता पर सवाल उठा रही हैं। यह समय है कि सरकार और सहकारी संस्थाएं इस मुद्दे को प्राथमिकता दें और सुनिश्चित करें कि वास्तविक किसानों को उनका हक मिले।

यह लेख सहकारिता विभाग के पोर्टल पर उपलब्ध डेटा और स्थानीय रिपोर्ट के आधार पर लिखा गया है।

Desclaimer

 यह लेख सहकारिता विभाग के पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों और स्थानीय रिपोर्टों के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें दिए गए सभी तथ्य और जानकारी लेखक के विश्लेषण पर आधारित हैं। यदि किसी भी प्रकार की त्रुटि या असत्यता पाई जाती है, तो उसके लिए संबंधित स्रोत जिम्मेदार होगा। इस लेख का उद्देश्य केवल सूचना प्रदान करना और संबंधित मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाना है। लेखक का किसी भी व्यक्ति, संस्था या संगठन को आहत करने का उद्देश्य नहीं है।



Saturday, January 25, 2025

Fraud in Kala Panchayat PACS Centre: Genuine Farmers Pushed to the Margins

By Our Correspondent

Lakshmipur Taluka, Jamui: The Primary Agricultural Cooperative Society (PACS) centre at Kala Panchayat has come under the scanner amid allegations of favoritism and malpractice in the procurement of paddy. Reports indicate that individuals holding government jobs, including employees of Indian Post, are selling large quantities of paddy despite having little to no involvement in farming.

This revelation has sparked widespread outrage among genuine farmers, raising questions about the credibility of the procurement process and the misuse of government schemes designed to uplift marginal farmers.


The Struggles of Real Farmers
Schemes like the Minimum Support Price (MSP) aim to provide a safety net for small and marginal farmers, but their implementation in Kala Panchayat paints a grim picture. Farmers like Aman Pandey, Anand Pandey, and Ajay Gope—who depend entirely on agriculture—have been left out in the cold.

Delays, alleged favoritism, and bureaucratic hurdles have kept genuine farmers from selling their produce.

"We toil for months to grow paddy, but when it's time to sell, we are sidelined. Those with government jobs and influence walk away with our share," lamented a local farmer.


Favoritism at the Forefront
The heart of the controversy lies in the misuse of the PACS system. Government employees and influential individuals are reportedly exploiting loopholes to bypass verification processes.

Key Concerns:

  • Verification Gaps: Weak checks allow non-farmers to sell paddy meant for genuine cultivators.
  • Financial Exploitation: PACS officials allegedly favor influential sellers over struggling farmers.
  • Systemic Failures: Many farmers are forced to sell to middlemen or at rates far below the MSP.

Farmers Call for Action
Outraged by the malpractice, farmers in Kala Panchayat have issued a set of demands:

  1. A thorough investigation into PACS activities to uncover fraudulent practices.
  2. Implementation of a stricter verification system to ensure only genuine farmers benefit.
  3. Greater transparency in the procurement process, with public access to data.
  4. Legal accountability for officials involved in malpractice.

A Widespread Problem
The PACS controversy in Kala Panchayat is not an isolated incident. It points to a deeper malaise in India’s agricultural procurement system, where the very institutions designed to support farmers are being misused.

"If farmers cannot access the benefits of PACS, the entire system fails in its purpose," said a local activist.


The Way Forward
The PACS system must be reformed to restore trust and ensure justice for the farming community. Farmers like Aman Pandey, Anand Pandey, and Ajay Gope represent the struggles of countless others across the state.

The question remains: Will authorities take decisive action to safeguard farmers' interests, or will the system continue to serve only the influential?

(With inputs from kala panchayat Bureau)

कला पंचायत में पीएम आवास सर्वेक्षण: मेरी मदद और बिचौलियों का खेल


कला पंचायत, लक्ष्मीपुर प्रखंड, जमुई जिले के कुछ लोगों के लिए मैं नि:शुल्क पीएम आवास ग्रामीण योजना के तहत सर्वेक्षण कराने में मदद कर रहा हूं। मेरा उद्देश्य था कि जरूरतमंदों को इस योजना का लाभ मिले और वे अपने पक्के मकान का सपना साकार कर सकें।

हालांकि, मेरी इस पहल के खिलाफ कुछ बिचौलिये सक्रिय हो गए हैं। ये बिचौलिये पंचायत के लोगों को यह कहकर गुमराह कर रहे हैं कि "अगर प्रवीण पांडे ने आपका सर्वेक्षण किया है, तो आपको पीएम आवास का लाभ नहीं मिलेगा।" इन लोगों का असली उद्देश्य ग्रामीणों को डराना और उनसे पैसे वसूलना है।

बिचौलियों की चालबाजियां

ये बिचौलिये ग्रामीणों को फॉर्म भरने और सर्वेक्षण कराने के नाम पर 1,000 से 3,000 रुपये तक वसूल रहे हैं। साथ ही, वे मेरे खिलाफ अफवाह फैला रहे हैं कि मैंने फॉर्म गलत भरा है, जिससे उनके फॉर्म रद्द हो जाएंगे। यह पूरी तरह झूठ है।

फॉर्म सुधारने का विकल्प

यदि किसी का फॉर्म गलत भरा गया है, तो सरकार ने इसे सुधारने का विकल्प दिया है। ग्रामीण अपने फॉर्म की जांच कर सकते हैं और आवश्यक सुधार कर सकते हैं। किसी को भी डरने या पैसे देने की आवश्यकता नहीं है।

मेरा उद्देश्य

मैंने यह पहल इसलिए की ताकि जरूरतमंद लोग बिना किसी आर्थिक दबाव के इस योजना का लाभ उठा सकें। मेरा काम पूरी तरह पारदर्शी और नि:शुल्क है। मैं सभी ग्रामीणों से अपील करता हूं कि वे बिचौलियों के बहकावे में न आएं और सीधे सरकारी प्रक्रिया का पालन करें।

ग्रामीणों के लिए संदेश

  1. अगर कोई आपसे पैसे मांग रहा है, तो इसकी शिकायत करें।
  2. सर्वेक्षण और फॉर्म भरने की प्रक्रिया पूरी तरह नि:शुल्क है।
  3. किसी भी समस्या के लिए मुझसे संपर्क करें, मैं आपकी मदद के लिए हमेशा तैयार हूं।

सच्चाई के साथ खड़े हों और बिचौलियों के जाल में न फंसें। मिलकर काम करेंगे, तो सभी को उनका हक मिलेगा।

Friday, January 24, 2025

Kala Panchayat Farmers Cry Foul Over PACS Irregularities

Jamui, Bihar: Farmers of Kala Panchayat in Laxmipur Taluka have raised strong objections to the alleged irregularities at the Primary Agricultural Cooperative Society (PACS) center. Despite the government’s Minimum Support Price (MSP) for paddy being set at ₹2,300 per quintal, the PACS center is reportedly refusing to procure paddy at the mandated price, leaving farmers frustrated and financially strained.

In a significant development, farmer leader Ajay Kumar Gope, along with Aman Pandey and Aanand Pandey, met with the District Magistrate (DM) of Jamui yesterday during the "Janta Darbar" public hearing. The delegation presented their grievances and demanded immediate action to address the issue.

PACS Center Under Fire
The farmers accused the PACS center in Kala Panchayat of pressuring them to sell their produce at a much lower rate of ₹18-₹20 per kilogram. Ajay Kumar Gope, who has registered 200 quintals of paddy, highlighted how farmers are being harassed and denied their rightful MSP.

"I personally registered my paddy, yet PACS officials refuse to buy it at the proper rate. This is not just my problem but a crisis faced by every farmer in our Panchayat," Gope said.

Aman Pandey and Aanand Pandey, both small-scale farmers, added that this issue is recurring every year. Aman Pandey stated, "We are repeatedly forced to sell at lower rates. PACS officials always have excuses, but this affects our livelihoods deeply."

A Long-Standing Issue
According to farmers, PACS officials often blame rice mill owners, alleging that their demands for additional quantities of paddy during processing delay procurement. This forces farmers to sell their produce at reduced rates, fearing storage losses and financial instability.

Despite holding valid registration forms, many farmers are unable to sell their produce at PACS centers, leading to mounting frustrations and a sense of betrayal.

Farmers’ Demands Presented to the DM
During the meeting, the farmers outlined the following key demands:

  1. Immediate procurement of paddy at the government-mandated MSP.
  2. Strict action against PACS officials involved in corrupt practices.
  3. Implementation of a transparent procurement process to prevent such issues in the future.

Hope for Justice
The DM assured the farmers that their complaints would be investigated and appropriate measures would be taken to resolve the issues. However, the farmers remain cautiously optimistic, waiting to see if the administration will deliver on its promises.

What’s Next?
Ajay Kumar Gope, Aman Pandey, and Aanand Pandey, who have been at the forefront of this movement, stated that this meeting is just the beginning. Ajay said, “If action is not taken, we will escalate our efforts to ensure farmers receive the justice they deserve.”

The refusal of Kala Panchayat PACS center to procure paddy at MSP has put the spotlight on systemic inefficiencies in rural procurement. As the farmers await administrative action, their collective resolve continues to grow.

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Why Farmers in kala panchayat Are Losing Trust in PACS Centers

The farmers of Kala Panchayat in Laxmipur Taluka, Jamui District, Bihar, are grappling with a persistent struggle that exposes the shortcomings of Bihar's rural economy and government policies. Today, a group of farmers from Kala Panchayat visited the DM office in Jamui and voiced their grievances during the DM's "Janta Darbar" (public hearing). They raised a crucial question: when the government has set the Minimum Support Price (MSP) for paddy at ₹2,300 per quintal (₹23 per kilogram) for the 2024-25 Kharif marketing season , why are PACS (Primary Agricultural Cooperative Society) officials pressuring farmers to sell their produce at a reduced rate of ₹18-₹20 per kilogram?

This issue is not new. Year after year, the same story unfolds. Farmers revealed that PACS officials often blame rice mill owners, claiming that they demand additional paddy during processing, which hinders the purchase process. As a result, farmers are forced to sell their hard-earned harvest at unreasonably low prices, bearing the brunt of systemic inefficiencies.

Pramod Pandey, an educated farmer from Kala Panchayat, has been at the forefront of this fight. He has reached out to local MLAs and various government departments, lodging complaints and raising awareness through blogs and video clips. He has consistently highlighted the plight of farmers and exposed the irregularities in PACS centers. Speaking about the ongoing issue, Pramod Pandey stated, "This is not just my battle. It is a fight for all farmers who are being denied their rightful earnings every year."

Farmers further pointed out that the condition of PACS centers in Laxmipur Taluka is even worse. Despite being home to many beneficiaries of the Pradhan Mantri Kisan Samman Nidhi Yojana, only a handful of farmers sell their paddy at PACS centers. This raises serious questions about the functioning of these centers and the trust deficit among farmers regarding government systems.

During today’s hearing, the farmers passionately questioned why they must struggle for their rights every year. They urged the DM to take immediate action and ensure that PACS centers purchase paddy at the government-mandated price, providing farmers with their rightful dues.

This time, the farmers of Kala Panchayat have broken their silence. They have resolved not to endure this injustice any longer. The arguments and evidence presented before the DM are not mere complaints; they symbolize the beginning of a movement.

Now, all eyes are on the administration. Will the authorities take concrete steps to address this pressing issue? Will the farmers of Kala Panchayat finally receive the justice they deserve? Or will their voices once again get buried under heaps of bureaucratic paperwork? Farmers remain hopeful that their hard work and perseverance will not go unnoticed this time.


Wednesday, January 22, 2025

PMAY-G में जागरूकता की कमी: कैसे मैं लोगों की मदद कर रहा हूं


प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण: मेरी मदद से घर का सपना पूरा हुआ

सपनों को हकीकत में बदलने का सफर
गांवों की गलियों में चलते हुए, मैंने अक्सर उन परिवारों को देखा जिनके पास रहने के लिए एक पक्का घर नहीं था। टूटी हुई छतें, दीवारों पर पड़ी दरारें, और बारिश में टपकते घर, यह सब देखकर मेरे दिल में एक सवाल उठता था, "क्या मैं इनके लिए कुछ कर सकता हूं?" प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) ने इस सवाल का जवाब दिया। मैंने तय किया कि मैं इस योजना के तहत जरूरतमंदों की मदद करूंगा।


मुफ्त में सेवा, खुशियां अनमोल

PMAY-G योजना में ऑनलाइन स्वयं-सर्वेक्षण (Self Survey) करना जरूरी है। लेकिन, गांव के लोग तकनीकी जानकारी की कमी और ऑनलाइन प्रक्रियाओं से अनजान थे। यहीं से मेरा सफर शुरू हुआ। मैंने फैसला किया कि मैं इन परिवारों को पूरी तरह मुफ्त में सर्वेक्षण प्रक्रिया में मदद करूंगा।


जिनकी मदद की, उनके चेहरे पर मुस्कान लाई

1. सुनीता देवी पति मनोहर पांडे

सुनीता देवी का घर बांस और मिट्टी से बना था, जो हर बरसात में उन्हें परेशान करता था। वह इस योजना के बारे में जानती थीं, लेकिन ऑनलाइन प्रक्रिया से घबरा रही थीं। मैंने उनकी सारी जानकारी दर्ज की और सर्वेक्षण पूरा किया। उनके चेहरे पर जो सुकून था, वो शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।

2. हेमा देवी पति करू ठाकुर

हेमा देवी ने मुझसे कहा, "बेटा, ये मोबाइल तो हमारे बस की बात नहीं।" मैंने उन्हें भरोसा दिलाया और उनके सर्वेक्षण को पूरा किया। आज वह कहती हैं, "अब मेरा घर भी मजबूत होगा, जैसे मेरे सपने।"

3. सबिता देवी पति ललन पांडे

सबिता देवी ने कहा, "घर बन जाए, तो हमारे बच्चों का भविष्य भी बदल जाएगा।" उनकी इस उम्मीद को सच करने के लिए मैंने अपनी पूरी कोशिश की। उनका सर्वेक्षण पूरा होते ही उनकी आंखों में जो चमक थी, वह मेरे लिए सबसे बड़ा इनाम था।

4. मधुरी देवी पति ओंकार पांडे

मधुरी देवी का घर इतना पुराना था कि उसमें रहने से डर लगता था। मैंने उनका ऑनलाइन सर्वेक्षण पूरा किया और उन्हें भरोसा दिलाया कि अब उनका घर भी सुरक्षित और सुंदर होगा।


मेरा तरीका: सिर्फ मदद, बिना किसी स्वार्थ के

  • प्रक्रिया को आसान बनाना: लोगों को सरल भाषा में समझाया कि यह योजना कैसे काम करती है।
  • ऑनलाइन प्रक्रिया का बोझ उठाना: हर परिवार की जानकारी खुद दर्ज की।
  • समय और सेवा: हर परिवार को समय दिया, धैर्य से उनकी बात सुनी, और उन्हें प्रक्रिया से जोड़ा।

मेरा सपना: हर घर हो सुरक्षित और मजबूत

मेरा उद्देश्य केवल ऑनलाइन सर्वेक्षण तक सीमित नहीं है। मैं चाहता हूं कि गांव का हर परिवार सरकारी योजनाओं का लाभ उठाए और आत्मनिर्भर बने। मैं अन्य लोगों को भी इस प्रक्रिया में मदद करने के लिए प्रेरित कर रहा हूं।


खुशियां बांटना: सबसे बड़ा इनाम

इन परिवारों की कहानियां सुनकर मुझे एहसास हुआ कि हमारी छोटी-छोटी मदद किसी के जीवन में बड़ी खुशियां ला सकती है। उनकी आंखों की चमक और उनके चेहरों पर आई मुस्कान मेरे लिए सबसे अनमोल तोहफा है।


"अगर हम मिलकर हर जरूरतमंद तक मदद पहुंचाएं, तो यह दुनिया और भी खूबसूरत बन सकती है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि एक सपनों की नींव है। चलिए, इसे मिलकर मजबूत बनाते हैं।"

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह लेख केवल जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी लेखक के व्यक्तिगत अनुभवों और विचारों पर आधारित है। लेख में उल्लेखित घटनाएं, व्यक्ति, और स्थितियां वास्तविक हैं, लेकिन इनका उद्देश्य किसी को ठेस पहुंचाना या अपमानित करना नहीं है।

लेख में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) और उससे संबंधित प्रक्रियाओं का वर्णन किया गया है, जो सरकार द्वारा निर्धारित नियमों और दिशानिर्देशों पर आधारित है। किसी भी सरकारी योजना या प्रक्रिया में बदलाव होने पर, कृपया आधिकारिक स्रोतों या संबंधित विभाग से संपर्क करें।

लेख में दी गई जानकारी का उपयोग पूरी सावधानी और सत्यापन के बाद करें। यदि कोई त्रुटि या असुविधा होती है, तो इसके लिए लेखक या प्रकाशक जिम्मेदार नहीं होंगे।

ध्यान दें: किसी भी प्रकार की वित्तीय लेन-देन या योजना से संबंधित निर्णय लेने से पहले, आधिकारिक वेबसाइट या स्थानीय अधिकारियों से पुष्टि करें।


Tuesday, January 21, 2025

सेल्फ-सर्वेक्षण से मिलेगा आराम: अब घर बैठे करें प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए रजिस्ट्रेशन


प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के अंतर्गत 2024-25 से 2028-29 तक 2 करोड़ नए घरों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए सरकार ने आवास प्लस 2024 सर्वेक्षण शुरू किया है, जिसमें ग्रामीण परिवार अपनी जानकारी स्वयं दर्ज कर सकते हैं। इस प्रक्रिया में सेल्फ-सर्वेक्षण की सुविधा दी गई है, जो लाभार्थियों को सर्वेक्षण दल पर निर्भर रहने से मुक्त करती है।

आवास प्लस ऐप के माध्यम से आप घर बैठे अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। ऐप डाउनलोड करने के बाद आपको अपनी पारिवारिक जानकारी जैसे सदस्यों की संख्या, आय का स्रोत और वर्तमान आवास की स्थिति दर्ज करनी है। साथ ही, आधार कार्ड और अन्य आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने हैं। सबमिट करने के बाद एक रसीद प्राप्त होगी, जिससे आप यह सुनिश्चित कर सकें कि आपकी जानकारी दर्ज हो चुकी है।

यह पूरी प्रक्रिया नि:शुल्क है। किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा, और आप बिना किसी अतिरिक्त खर्च के इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।

यदि आपको प्रक्रिया को समझने में कोई कठिनाई हो रही है, तो आप यह यूट्यूब वीडियो देख सकते हैं, जिसमें सेल्फ-रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया गया है।

आवास प्लस ऐप डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें।

यदि आपको किसी सहायता की आवश्यकता हो, तो आप मुझसे संपर्क कर सकते हैं। मेरा मोबाइल नंबर 9987685614 है। मैं इस प्रक्रिया में आपकी पूरी मदद करूंगा, और यह सहायता भी पूरी तरह नि:शुल्क है।

सरकार ने 31 मार्च 2025 तक यह प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य रखा है। इसलिए, आज ही अपनी जानकारी दर्ज करें और अपने सपनों के घर की ओर पहला कदम बढ़ाएं। यह योजना आपके और आपके परिवार के भविष्य को सुरक्षित करने का एक सुनहरा अवसर है।


अस्वीकरण:

यह सूचना प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के तहत ग्रामीण परिवारों को घर बनाने के लिए सहायता प्राप्त करने में मदद करने के उद्देश्य से प्रदान की गई है। यह प्रक्रिया पूरी तरह से नि:शुल्क है और इसमें कोई भी शुल्क नहीं लिया जाएगा। आवास प्लस ऐप के माध्यम से स्वयं रजिस्ट्रेशन करने की सुविधा दी गई है। हालांकि, ऐप डाउनलोड और रजिस्ट्रेशन से संबंधित किसी भी प्रकार की तकनीकी सहायता के लिए संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया जा सकता है। कृपया यह सुनिश्चित करें कि आप अपनी जानकारी सही और सत्यापित रूप में प्रदान करें। सरकार द्वारा निर्धारित तिथि, 31 मार्च 2025 तक रजिस्ट्रेशन पूरा करने का लक्ष्य है। कोई भी अतिरिक्त जानकारी या सहायता के लिए आप मुझसे संपर्क कर सकते हैं।



Wednesday, January 15, 2025

A Day Full of Gratitude: It's My Birthday


Today feels different. It’s as if the air carries a soft melody, the world seems a little brighter, and my heart feels a little fuller. Today is my birthday – a day that reminds me of the beauty of being alive, of growth, and of endless possibilities.

As the morning sun streamed through my window, I took a quiet moment to reflect. Birthdays are not just about marking another year; they’re about celebrating the stories that each year writes in the book of our lives. This past year has been a blend of challenges, lessons, and moments of pure joy. Every step, whether light or heavy, has brought me to where I stand today, and for that, I am deeply grateful.

But this birthday feels even more special because of two tiny yet mighty reasons: my beautiful daughters. My 3-year-old daughter, with her endless curiosity and laughter, fills my days with wonder. Her innocence reminds me to find joy in the simplest things, like painting a diya or chasing butterflies. And then there’s my 7-month-old baby, whose tiny hands and sparkling eyes bring pure bliss to my world. They are my greatest blessings, my constant motivation to be the best version of myself, and the reason my heart feels so full today.

Birthdays carry an inexplicable magic. When I was a child, it was the thrill of balloons, the taste of cake, and the excitement of unwrapping presents. Back then, it was about the outward joy – the laughter, the games, and the celebrations. But now, it’s about the quiet magic within – the joy of gratitude, the peace of reflection, and the hope for the future.

Today, I want to spend my time in ways that truly matter: reconnecting with loved ones, indulging in my favorite treats, and gifting myself moments of stillness to dream about the year ahead. Maybe I’ll take a walk and soak in the beauty of the world or write down all the things I’m grateful for.

But above all, today is a reminder to celebrate life itself – the small wins, the silent battles, and the journey that unfolds, day by day. As I step into another year, I carry with me the promise to live fully, to love deeply, and to create a world where my daughters can grow and thrive.

Lastly, I want to thank everyone who has taken the time to send me birthday wishes. Your kind words, thoughtful messages, and warm blessings have truly made my day even brighter. Knowing that so many people care enough to celebrate this day with me, even from afar, is a gift I cherish deeply. Thank you for being a part of my journey and for adding so much joy to this special day.

Here’s to the journey ahead, to the people who fill my heart with warmth, and to the universe for granting me this beautiful gift of life. Happy birthday to me – and to another year of embracing life’s wonders!


Tuesday, January 14, 2025

"किसानों के लिए बिजली की आपूर्ति का तत्काल समाधान: एसबीपीडीसीएल से निवेदन"

एसबीपीडीसीएल (दक्षिण बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड) की टीम ने हाल ही में किसानों की मदद के लिए उत्कृष्ट काम किया है। उन्होंने बिजली ट्रांसफर और तारों की लेबलिंग का काम समय पर और बड़े पैमाने पर किया, जिससे किसान अपने कृषि कार्यों के लिए बिजली के बेहतर उपयोग की उम्मीद कर रहे थे। इस कार्य में तकनीकी दक्षता और सतर्कता का पूरी तरह से ध्यान रखा गया। ट्रांसफार्मर को सही जगह पर स्थापित किया गया और सभी तारों को उचित तरीके से लेबल किया गया।

लेकिन इसके बावजूद, ट्रांसफार्मर से बिजली की आपूर्ति अब तक शुरू नहीं हो पाई है। यह स्थिति किसानों के लिए बेहद निराशाजनक है। करीब 200 मीटर दूर कुछ उपभोक्ता अस्थाई तारों का इस्तेमाल करके अपने पानी पंप चला रहे हैं। यह तरीका न केवल असुरक्षित है, बल्कि स्थायी समाधान नहीं है।

बिजली न होने की वजह से किसानों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। खेतों की सिंचाई प्रभावित हो रही है, जिससे फसल पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसके अलावा, डीजल पंप का उपयोग करने से किसानों को अतिरिक्त खर्च का सामना करना पड़ रहा है, जो पहले से ही आर्थिक दबाव में हैं। इन समस्याओं से निपटने के लिए बिजली की आपूर्ति का जल्द से जल्द शुरू होना बेहद आवश्यक है।

हम एसबीपीडीसीएल से निवेदन करते हैं कि कृपया इस ट्रांसफार्मर से बिजली की आपूर्ति शीघ्र शुरू करें ताकि किसान अपने कृषि कार्यों को बिना किसी रुकावट के पूरा कर सकें और उनकी समस्याओं का समाधान हो सके।

इस मुद्दे को लेकर प्रशासन और एसबीपीडीसीएल से उम्मीद की जा रही है कि वे जल्द से जल्द ट्रांसफार्मर को चालू करके किसानों को राहत प्रदान करेंगे। जब तक बिजली की आपूर्ति शुरू नहीं होती, तब तक किसानों को अस्थायी समाधानों से राहत नहीं मिल सकती। एसबीपीडीसीएल की टीम ने अच्छा काम किया है, लेकिन असली राहत तभी मिलेगी जब किसानों को बिजली का वास्तविक लाभ मिलेगा।

अस्वीकरण (Disclaimer):

इस ब्लॉग में दी गई जानकारी लेखक के व्यक्तिगत विचारों पर आधारित है। यह जानकारी किसी भी सरकारी या निजी संगठन के दृष्टिकोण, नीति या मार्गदर्शन का प्रतिनिधित्व नहीं करती है। लेखक द्वारा प्रदान की गई जानकारी सही और सटीक होने का प्रयास किया गया है, लेकिन किसी भी प्रकार की गलत जानकारी या त्रुटि के लिए लेखक जिम्मेदार नहीं होगा। किसी भी निर्णय से पहले, संबंधित अधिकारियों या विशेषज्ञों से परामर्श करना अत्यंत आवश्यक है।

इस ब्लॉग का उद्देश्य केवल सूचनात्मक है और किसी भी प्रकार के कानूनी, वित्तीय या तकनीकी सलाह के रूप में इसे नहीं लिया जाना चाहिए।





Monday, January 13, 2025

महाकुंभ 2025 में एक IITian का बाबा


महाकुंभ 2025 में एक IITian का बाबा के रूप में आना कई सवालों को जन्म देता है। क्या शिक्षा का उद्देश्य केवल पैसा कमाना और भौतिक सफलता हासिल करना है? या फिर शिक्षा का एक गहरा, आत्मिक पहलू भी है? यह सवाल उस समाज के लिए भी महत्वपूर्ण है, जो भौतिकता और अध्यात्म के बीच खुद को उलझा हुआ पाता है।

IIT जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से पढ़ाई करने वाले बाबा ने समाज की पारंपरिक सोच को चुनौती दी। उन्होंने दिखाया कि शिक्षा केवल करियर बनाने का जरिया नहीं, बल्कि आत्मा को जानने और जीवन के गहरे अर्थ को समझने का माध्यम हो सकती है। उनका मानना है कि असली दौलत आत्मिक शांति और संतोष में है, न कि सैलरी के आंकड़ों में।

समाज अक्सर यह उम्मीद करता है कि IIT जैसे संस्थानों से निकले लोग ऊंचे पदों पर काम करेंगे और आर्थिक सफलता हासिल करेंगे। लेकिन बाबा ने यह दिखाया कि ज्ञान का असली उद्देश्य आत्मा की उन्नति है। उन्होंने भौतिक उपलब्धियों को पीछे छोड़कर अध्यात्म का रास्ता चुना।

उनकी कहानी इस धारणा को भी तोड़ती है कि जीवन का उद्देश्य केवल भौतिक चीजों में है। उन्होंने यह सवाल उठाया कि क्या हम अपने जीवन के असली उद्देश्य को समझने की कोशिश कर रहे हैं? क्या हम यह सोचते हैं कि हमारी शिक्षा हमें केवल आर्थिक सफलता के लिए तैयार कर रही है या फिर आत्मिक विकास के लिए भी?

कुछ लोगों ने यह सवाल उठाया कि बाबा ने IIT में पढ़ाई करके 

देश के टैक्सपेयर्स के पैसे को बर्बाद किया। लेकिन बाबा ने अपने तरीके से समाज को सेवा करने का एक नया रास्ता दिखाया। उनका अध्यात्म की ओर झुकाव केवल उनकी व्यक्तिगत यात्रा नहीं है, बल्कि समाज के लिए एक प्रेरणा भी है। यह दिखाता है कि शिक्षा और अध्यात्म विरोधाभासी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं।

उनकी कहानी हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि सफलता का असली अर्थ क्या है। क्या सफलता केवल धन और शोहरत में है, या फिर आत्मिक संतोष और समाज की भलाई में भी? बाबा ने यह साबित किया कि शिक्षा का असली उद्देश्य केवल नौकरी पाना नहीं, बल्कि जीवन के बड़े सवालों के जवाब खोजना भी है।

IITian बाबा की यह यात्रा उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है, जो अपने जीवन के उद्देश्य को लेकर सवाल करते हैं। उन्होंने दिखाया कि शिक्षा और अध्यात्म मिलकर जीवन को संतुलित और सार्थक बना सकते हैं। उनकी कहानी हमें अपने भीतर झांकने और जीवन के असली अर्थ को समझने की प्रेरणा देती है।

महाकुंभ जैसे आयोजन में उनकी उपस्थिति ने इस बात को साबित कर दिया कि अध्यात्म और शिक्षा का संगम न केवल संभव है, बल्कि यह समाज और आत्मा दोनों के लिए अनिवार्य भी है। यह हमें याद दिलाती है कि असली दौलत आत्मा की शांति और संतोष में है, न कि केवल भौतिक उपलब्धियों में।