चुनावी एजेंडा: विकास से प्रतीकों की ओर रुख
आगामी लोकसभा चुनावों के नज़दीक आते ही राजनीतिक एजेंडा खासा बदलता नज़र आ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राम मंदिर निर्माण को केंद्रीय थीम के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं और लगता है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) चुनावी सफलता के लिए राम मंदिर के भावनात्मक जुड़ाव को भुनाने की कोशिश कर रही है।
हालांकि मोदी का एजेंडा मतदाताओं के एक वर्ग को भले ही लुभाए, लेकिन यह राजनीतिक दलों की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाता है। राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी भी मणिपुर से मुंबई तक पदयात्रा निकालकर जनता से जुड़ने की कोशिश कर रही है। लेकिन, इन भव्य इशारों के बीच शिक्षा, विकास और बुनियादी ज़रूरतों जैसे विषयों को दरकिनार किया जा रहा है।
यह आकलन करना महत्वपूर्ण है कि राम मंदिर जैसे प्रतीकात्मक प्रोजेक्ट्स पर ध्यान देना क्या वाकई में जनसंख्या की व्यापक ज़रूरतों को संबोधित करता है? पिछली चुनावी रणनीतियां, पाकिस्तान सर्जिकल स्ट्राइक से लेकर नोटबंदी और भ्रष्टाचार विरोधी अभियानों तक, कई वादों को अधूरा छोड़ गई हैं। वक्तव्य और ठोस नतीजों के बीच का अंतर ऐसे राजनीतिक एजेंडों की प्रभावशीलता पर संदेह जताता है।
इसके अलावा, जनमत बनाने में मीडिया की भूमिका को भी नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता है। कुछ आलोचकों का तर्क है कि भारतीय समाचार मीडिया के कुछ हिस्से, खासकर 'जागरण' और 'हिंदुस्तान' जैसे हिंदी अखबार, भाजपा सरकार के प्रति एक अनुकूल रुख रखते हैं। चुनिंदा रिपोर्टिंग के आरोप सामने आए हैं, जहां पेगासस स्पाईवेयर विवाद, एप्पल फोन हैकिंग, गुजरात ड्रग मामले और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लखनऊ में इमारतों के गिराए जाने जैसे मुद्दों को सीमित कवरेज मिलता है।
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका जांच के दायरे में है, क्योंकि निष्पक्ष जानकारी प्रदान करने की इसकी क्षमता तेजी से महत्वपूर्ण होती जा रही है। एक मजबूत लोकतंत्र सूचित नागरिकों पर निर्भर करता है, और मीडिया की जिम्मेदारी शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
निष्कर्ष रूप में, आगामी लोकसभा चुनाव विकासवादी एजेंडों से प्रतीकात्मक मुद्दों की ओर एक बदलाव को उजागर करते हैं। मतदाताओं की चुनौती इन एजेंडों की सावधानी से जांच करने और राजनीतिक नेताओं से जवाबदेही की मांग करने में निहित है। यद्यपि राम मंदिर का निर्माण सांस्कृतिक महत्व का विषय है, लेकिन उन ज्वलंत मुद्दों को संबोधित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है जो आम लोगों के दैनिक जीवन को प्रभावित करते हैं। मतदाताओं के रूप में, हमारी जिम्मेदारी है कि राजनीतिक दलों द्वारा किए गए वादों का आलोचनात्मक मूल्यांकन करें और शासन के लिए एक अधिक समावेशी और व्यापक दृष्टिकोण की वकालत करें।
अस्वीकरण:
यह निबंध मेरे व्यक्तिगत विचारों और राय को दर्शाता है। यह किसी भी राजनीतिक दल या व्यक्ति का समर्थन या विरोध नहीं करता है।
मेरी राय:
मेरा मानना है कि यह बदलाव चिंताजनक है। राजनीतिक दलों को विकासवादी मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है जो आम लोगों के जीवन को बेहतर बनाते हैं। राम मंदिर एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक मुद्दा है, लेकिन यह भारत के विकास के लिए प्राथमिकता नहीं होनी चाहिए।
मतदाताओं को इन एजेंडों की सावधानी से जांच करने और राजनीतिक नेताओं से जवाबदेही की मांग करने की आवश्यकता है। हमें यह सुनिश्चित करने के लिए काम करना चाहिए कि हमारे नेता उन मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करें जो वास्तव में मायने रखते हैं।
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