Friday, December 22, 2023

अपनी काबिलियत पहचानो, आसमान छू लो

ज़ंजीरें तोड़ो, उन्मुक्त पंखों से छू लो ज़िंदगी का आकाश

"दासता क्यों झेलनी, जब आसमान छूने की ताक़त आपके भीतर है?" - ये विचारधारा उस ज़मीर की आवाज़ है जो हमें अपनी काबिलियत पहचानने और थोपे हुए बंधनों से मुक्त होने की प्रेरणा देती है। अवसरों से भरे इस संसार में, खुद को सीमित रखना क्यों ज़रूरी?

स्वतंत्रता न सिर्फ खुद की ताक़त को समझने में बल्कि सामाजिक अपेक्षाओं की बेड़ियों को तोड़ने के साहस में भी निहित है। हर शख्सियत में अनूठे कौशल और प्रतिभा का खज़ाना छिपा होता है, बस इन्हें ढूंढकर निखारने की ज़रूरत है।

"अपनी काबिलियत पहचानो" का अर्थ है आत्म-खोज़ की यात्रा पर निकलना, संभावनाओं के पंखों को फैलाना और समाज के बनाए बाड़ों से परे उड़ान भरना। ये खुद थोपी और सामाजिक सीमाओं की ज़ंजीरों को तोड़ने का आह्वान है, जो हमें संभावनाओं के अनंत आकाश में प्रवेश करने का हौसला देता है।

तो जब आसमान बुला रहा है, दासता स्वीकार क्यों करें? अपनी ज़िंदगी को अपने हुनर, अपनी प्रतिभा से रोशन करें। ऊंचे, ज़्यादा ऊंचे उड़ें, क्योंकि इसी उड़ान में आपकी स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता का सच्चा एहसास छिपा है।

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